नई दिल्ली/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल और लेबनान युद्धविराम (सीजफायर) को लागू करने पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी मध्यस्थता में हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने संघर्ष कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में ऐसे सुरक्षा क्षेत्र बनाए जाएंगे, जहां केवल लेबनानी सेना की मौजूदगी रहेगी। वहीं, हिजबुल्ला को लितानी नदी के दक्षिणी हिस्से से अपने लड़ाकों और सैन्य गतिविधियों को हटाना होगा। युद्धविराम का पूर्ण क्रियान्वयन भी इसी शर्त पर निर्भर माना जा रहा है।
अमेरिका की मध्यस्थता में कई दौर की बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। दोनों देशों ने भविष्य में भी वार्ता जारी रखने और लंबी अवधि के समाधान की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है। आगामी हफ्तों में सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों पर आगे की बातचीत प्रस्तावित है।
हालांकि, हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। युद्धविराम की घोषणा के बावजूद सीमावर्ती क्षेत्रों में छिटपुट तनाव और सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में ड्रोन गतिविधियों और संघर्ष विराम उल्लंघन की आशंकाओं का भी जिक्र किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसकी सफलता काफी हद तक हिजबुल्ला और अन्य पक्षों द्वारा शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। लेबनान सरकार ने देश की संप्रभुता मजबूत करने और दक्षिणी क्षेत्रों में सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से इजरायल और हिजबुल्ला के बीच लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण क्षेत्र में तनाव चरम पर था। ऐसे में यह युद्धविराम समझौता हजारों प्रभावित लोगों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है।





