नई दिल्ली: वर्ष 2026 का स्वागत इस बार केवल आधुनिक पार्टियों या पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में अटूट आस्था और धार्मिक उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। नए साल के पहले दिन देशवासियों ने पिकनिक स्पॉट, पहाड़ों या समुद्र तटों के बजाय देवालयों को प्राथमिकता दी। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, देश के प्रमुख मंदिरों में लाखों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जिससे पूरा वातावरण ‘जयघोष’ और ‘भक्ति’ के रंग में सराबोर हो गया।
प्रमुख मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब
देश के विभिन्न कोनों से आई तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि नए साल की शुरुआत ईश्वर के दर्शन के साथ करने की परंपरा और मजबूत हुई है:
- काशी और अयोध्या: वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सुबह की पहली आरती से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। जय श्री राम और हर-हर महादेव के नारों से परिसर गूंज उठा।
- उज्जैन का महाकाल धाम: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ भीड़ जुटी। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेकर सुख-समृद्धि की कामना की।
- वैष्णो देवी और तिरुपति: कटरा में माता वैष्णो देवी के दरबार और दक्षिण भारत के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहाँ प्रशासन को भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
पहाड़ और समुद्र से ज्यादा मंदिरों की ओर रुझान
आमतौर पर नए साल पर लोग पहाड़ों की बर्फबारी या गोवा जैसे समुद्र तटों की ओर रुख करते थे, लेकिन इस बार रुझान ‘आध्यात्मिक पर्यटन’ (Spiritual Tourism) की ओर अधिक दिखा।
- होटल बुकिंग में बदलाव: ट्रेवल एजेंटों के अनुसार, हिल स्टेशनों के मुकाबले धार्मिक नगरों के होटलों और धर्मशालाओं में इस बार 40% अधिक बुकिंग दर्ज की गई।
- युवाओं की भागीदारी: इस बार मंदिरों में दर्शन करने वालों में युवाओं की संख्या उल्लेखनीय रही, जो पारंपरिक मूल्यों के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा
भारी भीड़ को देखते हुए सभी प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
- ड्रोन से निगरानी: कई मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया गया।
- विशेष दर्शन की सुविधा: बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष लाइनें और सहायता केंद्र बनाए गए ताकि उन्हें दर्शन में असुविधा न हो।
- प्रसाद और भंडारा: नए साल के अवसर पर कई मंदिरों में विशेष भोग लगाया गया और भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया।
एक सकारात्मक शुरुआत
श्रद्धालुओं का कहना है कि नए साल के पहले दिन मंदिर आने से मानसिक शांति और नई ऊर्जा मिलती है। देश के विभिन्न हिस्सों में संकीर्तन, भजन और हवन के साथ लोगों ने वर्ष 2026 के मंगलमय होने की प्रार्थना की। मंदिरों के बाहर फूलों और पूजा सामग्री की दुकानों पर भी जबरदस्त रौनक रही, जिससे स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिले नजर आए।





