अहमदाबाद/जोधपुर: लंबे समय से कानूनी विवादों में घिरे आसाराम आश्रम के अवैध निर्माणों पर अब प्रशासन का डंडा चलने वाला है। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आश्रम द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने की मंजूरी दे दी है। इस आदेश के बाद स्थानीय नगर निगम और जिला प्रशासन ने चिन्हित किए गए अवैध हिस्सों को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर और भारी पुलिस बल की तैनाती की तैयारी शुरू कर दी है। कोर्ट के इस सख्त रुख से साफ हो गया है कि सरकारी जमीन पर किए गए किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि: कैसे हुआ अतिक्रमण का खुलासा?
आश्रम के खिलाफ यह मामला कई वर्षों से विचाराधीन था, जिसमें सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण के आरोप लगाए गए थे:
- सरकारी जमीन पर कब्जा: प्रशासन द्वारा की गई पैमाइश में पाया गया था कि आश्रम ने अपनी आवंटित सीमा से कहीं अधिक जमीन पर दीवारें, कमरे और अन्य ढांचे खड़े कर लिए थे।
- नोटिस की अनदेखी: स्थानीय प्रशासन ने पूर्व में भी आश्रम प्रबंधन को अतिक्रमण हटाने के लिए कई नोटिस जारी किए थे, लेकिन आश्रम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, इस कार्रवाई को रोकने के लिए कानूनी दांवपेचों का सहारा लिया गया था।
कोर्ट का फैसला और सख्त टिप्पणी
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और राजस्व विभाग की रिपोर्ट देखने के बाद यह आदेश दिया:
- कानून सर्वोपरि: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक संस्था को कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं है। सरकारी जमीन पर किया गया कब्जा पूरी तरह से गैरकानूनी है।
- तत्काल कार्रवाई के निर्देश: अदालत ने प्रशासन को आदेश दिया है कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर अतिक्रमण को हटाकर जमीन को खाली कराया जाए और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
- लागत की वसूली: सूत्रों के अनुसार, कोर्ट ने यह भी संकेत दिए हैं कि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में आने वाला सारा खर्च आश्रम प्रबंधन से ही वसूला जा सकता है।
प्रशासन की तैयारी: चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर
आसाराम के समर्थकों के संभावित विरोध को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहा है:
- भारी पुलिस बल की तैनाती: ध्वस्तीकरण के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए पीएसी (PAC) और स्थानीय पुलिस की कई कंपनियां तैनात की जा रही हैं।
- बुलडोजर और मशीनों का इंतजाम: नगर निगम ने अतिक्रमण गिराने के लिए जेसीबी (JCB) और अन्य भारी मशीनों को स्टैंडबाय पर रखा है।
- धारा 144 की संभावना: आश्रम के आसपास के इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश (धारा 144) भी लागू किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष: भू-माफियाओं और अवैध कब्जेदारों को कड़ा संदेश
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन सभी के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा जो रसूख या धर्म की आड़ में सरकारी जमीनों पर कब्जा करते हैं। आश्रम प्रबंधन की ओर से अभी तक इस अदालती आदेश पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक हलचलों ने हलचल तेज कर दी है।
“अदालत का आदेश हमें मिल चुका है। हम कानून के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शिता के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेंगे। किसी भी तरह के व्यवधान से निपटने के लिए पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है।” — प्रशासनिक अधिकारी





