राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का वार्षिक विजयदशमी उत्सव मंगलवार को नागपुर मुख्यालय में धूमधाम से आयोजित हुआ। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देशवासियों से स्वदेशी को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाहरी निर्भरता को सीमित रखना होगा, ताकि यह हमारी मजबूरी में तब्दील न हो।
समारोह में परंपरागत शस्त्र पूजन के बाद संघ प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों और तकनीक पर बल देना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक संपर्क और व्यापार से परहेज नहीं किया जा सकता, लेकिन अंधी निर्भरता देश को कमजोर बना सकती है।
भागवत ने कहा, “आज भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है और पूरी दुनिया की नजरें हमारी ओर हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बाहरी तकनीक, संसाधन और पूंजी पर अत्यधिक निर्भरता कभी भी संकट का कारण बन सकती है। हमें स्वदेशी के माध्यम से अपनी जड़ों को मजबूत करना होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी केवल अर्थव्यवस्था की जरूरत नहीं है, बल्कि यह आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। भागवत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नवाचार और स्टार्टअप्स के जरिए देश को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
इस मौके पर संघ की शाखाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े स्वयंसेवकों ने पथ संचलन कर शक्ति प्रदर्शन किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और भगवा ध्वज के साथ विजयदशमी का उत्सव राष्ट्रभक्ति और अनुशासन के रंग में सराबोर रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों से आए अतिथि शामिल हुए। संघ ने इस अवसर पर देश की एकता, अखंडता और आत्मनिर्भरता को बनाए रखने का संकल्प भी दोहराया।





