नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया संबोधन को प्रेरणादायक बताया है। मोदी ने कहा कि भागवत ने अपने भाषण में भारत की परंपरा, क्षमता और वैश्विक नेतृत्व की संभावनाओं पर जिस तरह प्रकाश डाला है, वह हर भारतीय को नई ऊर्जा और दिशा देता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत बदलते वैश्विक परिदृश्य में न केवल अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सशक्त कर रहा है, बल्कि विज्ञान, तकनीक और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी दुनिया का मार्गदर्शन करने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हमारे पास अपार प्रतिभा और असीम संसाधन हैं। जब समाज और संगठन सकारात्मक दिशा में मिलकर कार्य करते हैं, तो देश नई ऊंचाइयों को छूता है।”
मोदी ने यह भी कहा कि भागवत के भाषण में सामाजिक सौहार्द, आत्मनिर्भरता और आधुनिक भारत के निर्माण का स्पष्ट संदेश निहित है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के संकल्प में भागीदार बनें।
उल्लेखनीय है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में संघ के वार्षिक कार्यक्रम में भाषण दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा, सामाजिक एकता, महिलाओं की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत जैसे मुद्दों पर विस्तृत विचार रखे।
भागवत ने कहा था कि भारत की ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक ज्ञान में निहित है, जिसे आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर विश्व को नई दिशा दी जा सकती है। इसी भाषण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश की प्रगति के लिए मार्गदर्शक बताया।





