Thursday, March 5, 2026

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आतंक का घातक ‘नेक्सस’: दोहा में हमास और लश्कर कमांडरों की गुप्त बैठक; भारतीय खुफिया एजेंसियां अलर्ट, क्या देश पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा?

नई दिल्ली/दोहा: वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक अत्यंत चिंताजनक घटनाक्रम सामने आया है। खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर है कि कतर की राजधानी दोहा में फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के शीर्ष नेताओं और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडरों के बीच एक गुप्त उच्च-स्तरीय बैठक हुई है। ‘आतंक के इस नए गठजोड़’ ने भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों संगठन हाथ मिलाते हैं, तो यह न केवल मध्य-पूर्व बल्कि दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

बैठक का एजेंडा: क्या खिचड़ी पक रही है?

सूत्रों के अनुसार, इस गुप्त बैठक का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ‘साझा दुश्मन’ के खिलाफ एक एकीकृत मोर्चे का निर्माण करना था।

  • रणनीतिक सहयोग: बैठक में कथित तौर पर हथियारों की तस्करी, फंड जुटाने (टेरर फंडिंग) और साइबर युद्ध तकनीकों को साझा करने पर चर्चा हुई है।
  • लश्कर का नया अवतार: पाकिस्तान पर वैश्विक दबाव (FATF आदि) के कारण लश्कर सीधे तौर पर सक्रिय होने के बजाय अब हमास जैसे वैश्विक पहचान वाले संगठनों के साथ ‘प्रॉक्सी’ गठबंधन की तलाश में है।

भारत के लिए ‘रेड अलर्ट’: क्यों बढ़ गई है चिंता?

खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठबंधन भारत के लिए कई मोर्चों पर खतरा पैदा कर सकता है:

  1. जम्मू-कश्मीर में नया मोड: लश्कर, हमास की गोरिल्ला युद्ध तकनीकों और सुरंग बनाने की कला का उपयोग कश्मीर घाटी में घुसपैठ और हमलों के लिए कर सकता है।
  2. कट्टरपंथ को बढ़ावा: हमास की हालिया गतिविधियों को ढाल बनाकर लश्कर भारत के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और ‘लोन वोल्फ’ (अकेले हमलावर) हमलों के लिए उकसा सकता है।
  3. इजरायली दूतावास और पर्यटक: भारत में मौजूद इजरायली दूतावासों और यहूदी धार्मिक स्थलों (जैसे मुंबई का नरीमन हाउस) पर हमले का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि हमास खुले तौर पर इजरायल और उसके सहयोगियों का दुश्मन है।

खुफिया एजेंसियों की सक्रियता

भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी RAW और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने इस इनपुट के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी है।

  • निगरानी: खाड़ी देशों में संदिग्ध फंड ट्रांसफर और भारत की ओर आने वाले डिजिटल संदेशों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: भारत ने इस संबंध में इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की है ताकि इस उभरते गठजोड़ को शुरुआत में ही बेअसर किया जा सके।

विशेषज्ञों की राय: ‘हाइब्रिड टेरर’ का खतरा

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बार है जब पश्चिम एशिया का कोई सुन्नी चरमपंथी संगठन और दक्षिण एशिया का भारत-केंद्रित आतंकी गुट इतनी गहराई से जुड़ रहे हैं। यह ‘हाइब्रिड टेरर’ का दौर है जहाँ सीमाएं कोई मायने नहीं रखतीं।

“हमास और लश्कर का मिलन कट्टरपंथ के वैश्वीकरण का हिस्सा है। भारत को अपनी समुद्री सीमाओं और डिजिटल स्पेस की सुरक्षा अब पहले से कहीं अधिक मजबूत करनी होगी।” — सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी एवं रक्षा विशेषज्ञ

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