नई दिल्ली/श्रीनगर: पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिज्ञों द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के घातक असर से लश्कर के भीतर गहरी फूट पड़ गई है। संगठन के शीर्ष कमांडरों के बीच वर्चस्व की जंग और फंड की भारी कमी ने इसे टूटने की कगार पर खड़ा कर दिया है। इसके साथ ही, लश्कर के आकाओं की चीन और अमेरिका के प्रति बढ़ती नाराजगी ने पाकिस्तान के भीतर नए सुरक्षा समीकरण पैदा कर दिए हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और इसका प्रभाव?
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहु-आयामी रणनीति अपनाई है, जिसे विशेषज्ञों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम दिया है:
- वित्तीय चोट: भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लश्कर के फंडिंग नेटवर्क को ब्लॉक करने में बड़ी सफलता हासिल की है, जिससे आतंकियों को मिलने वाला मासिक वेतन और रसद रुक गई है।
- रणनीतिक अलगाव: कूटनीतिक दबाव के चलते लश्कर के कई विदेशी समर्थकों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
- आतंकियों का सफाया: सीमा पर और कश्मीर के भीतर ‘टारगेटेड ऑपरेशन्स’ के जरिए लश्कर के अनुभवी कमांडरों को ढेर कर दिया गया है, जिससे संगठन में नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है।
चीन और अमेरिका से क्यों बढ़ी नाराजगी?
लश्कर-ए-तैयबा के भीतर इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि उनके पुराने मददगारों ने उनका साथ छोड़ दिया है:
- चीन का दोहरा रवैया: आतंकी गुटों का मानना है कि चीन केवल अपने आर्थिक हितों (CPEC) के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकियों को बचाने के लिए अब वह पहले जैसा जोखिम नहीं उठा रहा है।
- अमेरिकी दबाव: अमेरिका द्वारा लगातार पाकिस्तान पर एफएटीएफ (FATF) और अन्य प्रतिबंधों का डर बनाए रखने के कारण पाकिस्तानी सेना ने लश्कर की गतिविधियों पर जो लगाम कसी है, उससे आतंकी बौखलाए हुए हैं।
संगठन में फूट और नेतृत्व की जंग
खुफिया इनपुट बताते हैं कि लश्कर अब दो धड़ों में बंट गया है:
- पुराना धड़ा: जो हाफिज सईद के परिवार के प्रति वफादार है और पारंपरिक तरीकों से लड़ना चाहता है।
- नया बागी धड़ा: जो संगठन की सुस्ती और फंड की कमी से नाराज है। यह गुट अब आईएसआईएस (ISIS) जैसे अन्य कट्टरपंथी संगठनों के साथ हाथ मिलाने की फिराक में है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
खुफिया विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकी संगठन में जब भी ऐसी फूट पड़ती है, तो वे अपनी प्रासंगिकता साबित करने के लिए ‘लोन वुल्फ’ अटैक या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। इसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर और अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत अब उन स्लीपर सेल्स को निशाना बनाया जा रहा है जो इस आपसी फूट का फायदा उठाकर भागने की फिराक में हैं।
निष्कर्ष: भारत की बड़ी रणनीतिक जीत
लश्कर के भीतर पैदा हुई यह दरार भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और कूटनीतिक दबाव की बड़ी जीत मानी जा रही है। बिना युद्ध लड़े दुश्मन के खेमे को भीतर से कमजोर करना भारतीय विदेश नीति और सुरक्षा तंत्र की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।





