नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच संपन्न हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक ‘क्रांतिकारी मोड़’ बताते हुए कहा कि “आज का दिन भारतीय व्यापार के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।” नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने इस डील के उन प्रमुख फायदों को विस्तार से साझा किया, जो आने वाले समय में भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
व्यापार समझौते के 5 प्रमुख स्तंभ: मंत्री गोयल की नजर से
पीयूष गोयल ने समझौते की बारीकियों को समझाते हुए इसके दूरगामी आर्थिक लाभों को रेखांकित किया:
- निर्यातकों के लिए खुला आसमान: उन्होंने बताया कि कई प्रमुख सेक्टरों में टैरिफ (आयात शुल्क) कम होने या हटने से भारतीय उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। इससे विशेष रूप से कपड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में भारी उछाल आएगा।
- MSME सेक्टर को संजीवनी: मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत के लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को ग्लोबल सप्लाई चेन का अभिन्न हिस्सा बनाएगा। अब छोटे उद्यमी भी बिना किसी बाधा के अपने उत्पाद सीधे अमेरिकी खरीदारों तक पहुँचा सकेंगे।
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का हस्तांतरण: पीयूष गोयल के अनुसार, अमेरिका से उच्च तकनीक और सेमीकंडक्टर उपकरणों के आसान आयात से भारत में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियानों को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर जोर
वाणिज्य मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिलेगा:
- करोड़ों नए रोजगार: उन्होंने विश्वास जताया कि निर्यात बढ़ने और अमेरिकी निवेश के भारत आने से विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र में रोजगार के करोड़ों नए अवसर पैदा होंगे।
- सस्ते होंगे विदेशी उत्पाद: समझौते के तहत कुछ प्रमुख वस्तुओं पर शुल्क कम होने से भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी उत्पाद अब कम कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे।
- कृषि निर्यात में बढ़ोतरी: भारतीय किसानों के लिए अच्छी खबर देते हुए उन्होंने कहा कि अब भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे और अधिक चौड़े हो गए हैं।
‘भरोसेमंद पार्टनर’ के रूप में भारत की पहचान
पीयूष गोयल ने कहा कि यह डील केवल व्यापारिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच अटूट भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि दुनिया अब एक वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लाई चेन चाहती है, और भारत उस भूमिका को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।





