गुवाहाटी। असम में विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। भाजपा मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया और गौरव गोगोई पर निजी हमले करते हुए उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े किए। सरमा ने स्पष्ट किया कि यदि प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई है, तो पुलिस का कर्तव्य है कि वह कानून के दायरे में रहकर अपराधियों और आरोपियों के घर तक पहुँचे।
पवन खेड़ा मामला: ‘कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है कार्रवाई’
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस किसी के ‘पीछे’ नहीं पड़ी है, बल्कि वह अपनी ड्यूटी निभा रही है।
- शिकायत का आधार: यह पूरा मामला मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि खेड़ा के पास कथित तौर पर एक से अधिक पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में बेनामी संपत्तियां हैं।
- पुलिस की भूमिका: मंगलवार को असम पुलिस की एक टीम खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर तलाशी लेने पहुँची थी। सीएम सरमा ने कहा, “पुलिस को कानून का पालन करने और अपराधियों के घर जाने के लिए वेतन मिलता है। अगर उनके खिलाफ मामला दर्ज है, तो पुलिस उनके घर जाएगी ही।”
गौरव गोगोई पर तीखा हमला: ‘भारतीय परिवार’ और नागरिकता का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई पर कटाक्ष करते हुए उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।
- मतदान का जिक्र: सरमा ने चुटकी लेते हुए कहा कि गौरव गोगोई अपनी मां के साथ वोट डालने गए थे, जबकि वह स्वयं अपनी पत्नी के साथ गए थे।
- ब्रिटिश नागरिकता पर सवाल: मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई की पत्नी और बच्चों की ब्रिटिश नागरिकता का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि जो व्यक्ति अपने परिवार को भारतीय नहीं बना सका, वह देश की सेवा कैसे करेगा? उन्होंने कहा कि गोगोई की यह स्थिति उनके आरोपों को साबित करती है।
यूसीसी और भविष्य की रणनीति: ‘परामर्श के बाद होगा फैसला’
मुख्यमंत्री ने चुनावी नतीजों के बाद की योजनाओं पर भी चर्चा की, जिसमें समान नागरिक संहिता (UCC) प्रमुख रही।
- जल्दबाजी नहीं: सरमा ने घोषणा की कि यदि भाजपा सत्ता में लौटती है, तो राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी, लेकिन यह प्रक्रिया जल्दबाजी में नहीं होगी।
- सामुदायिक संवाद: उन्होंने कहा कि असम की विभिन्न जनजातियों और समुदायों की विशिष्ट परंपराओं को ध्यान में रखते हुए उनसे विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य में चुनाव का एक ही चरण में शांतिपूर्वक संपन्न होना इस बात का प्रमाण है कि असम में विकास और निवेश का नया दौर शुरू हो चुका है।





