अल्मोड़ा/मोहान (25 मार्च, 2026): जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों के बीच उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में बहने वाली कोसी नदी में इन दिनों ऊदबिलावों (Otters) का एक दुर्लभ जमावड़ा देखा जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि ऊदबिलावों की उपस्थिति को स्वच्छ जल और एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का सबसे सटीक पैमाना माना जाता है। कोसी के शांत जल में एक साथ 8 से 10 ऊदबिलावों के कुनबे का अठखेलियां करना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि क्षेत्र में प्राकृतिक संतुलन एक बार फिर पटरी पर लौट रहा है।
मोहान रेंज में दुर्लभ नजारा: एक दशक बाद बढ़ी संख्या
अल्मोड़ा वन प्रभाग के मोहान रेंज में ऊदबिलावों की वापसी ने पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है:
- दशक भर का अंतराल: लगभग 10 साल पहले वन विभाग ने मोहान से ढिकुली तक कोसी नदी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था, जिसमें ऊदबिलावों की संख्या काफी कम और छिटपुट पाई गई थी।
- अचानक वापसी: पिछले कुछ वर्षों में ये जीव लगभग ओझल से हो गए थे, लेकिन अब एक साथ 8 से 10 ऊदबिलावों का समूह दिखना विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय बन गया है।
- पारिस्थितिकी का सूचक: विशेषज्ञ मानते हैं कि ऊदबिलाव वहीं पनपते हैं जहां पानी साफ हो और मछलियों की पर्याप्त उपलब्धता हो। कोसी में इनका दिखना नदी के स्वास्थ्य में सुधार को दर्शाता है।
संरक्षण प्रयासों का असर: मानवीय हस्तक्षेप पर लगाम
ऊदबिलावों की संख्या में इस वृद्धि के पीछे वन विभाग के निरंतर प्रयास और कड़े नियम मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- मत्स्य संरक्षण: नदी क्षेत्र में अवैध शिकार और मछलियों को पकड़ने की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई गई, जिससे ऊदबिलावों के लिए भोजन की कमी दूर हुई।
- अनियोजित विकास पर रोक: कोसी नदी के किनारों पर होने वाले अवैज्ञानिक निर्माण और मानवीय दखल को कम किया गया, जिससे इन शर्मीले जीवों को अपना प्राकृतिक आवास वापस मिल सका।
- भविष्य की संभावनाएं: पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि संरक्षण की यही गति बनी रही, तो भविष्य में कोसी नदी ऊदबिलावों के लिए देश के सबसे बेहतर प्राकृतिक आवासों में से एक बन सकती है।





