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अर्धकुंभ 2027: अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, साधुओं को आईडी और आधार कार्ड दिखाना होगा अनिवार्य; फर्जी साधुओं पर लगेगा अंकुश

हरिद्वार/उज्जैन (21 मार्च, 2026): अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) ने आगामी अर्धकुंभ-2027 (हरिद्वार) और सिंहस्थ कुंभ-2028 (उज्जैन) को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। परिषद के अध्यक्ष और श्रीमनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख, श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने शनिवार को घोषणा की कि इन दोनों भव्य मेलों में किसी भी साधु-संत या भगवाधारी को बिना आधिकारिक पहचान पत्र (आईडी) और आधार कार्ड के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय अर्धकुंभ और कुंभ मेले की गरिमा बनाए रखने, फर्जी साधुओं की पहचान करने और अवांछित तत्वों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।

पहचान पत्र अनिवार्य: फर्जी साधुओं पर प्रहार

श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट किया कि अर्धकुंभ-2027 और सिंहस्थ कुंभ-2028 में साधु-संतों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य करने का निर्णय कई कारणों से लिया गया है:

  1. फर्जी साधुओं की पहचान: पिछले कुछ वर्षों में, कुंभ और अर्धकुंभ मेलों में फर्जी साधुओं के प्रवेश की शिकायतें मिली हैं, जो मेले की पवित्रता और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। पहचान पत्र अनिवार्य होने से असली साधु-संतों की पहचान आसान हो जाएगी और फर्जी साधुओं को मेले में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा।
  2. सुरक्षा और व्यवस्था: पहचान पत्र के जरिए मेले में आने वाले सभी साधु-संतों का डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा, जिससे सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी। किसी भी अप्रिय स्थिति में, पहचान पत्र के जरिए संबंधित साधु-संत की पहचान और उनके अखाड़े के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
  3. पारदर्शिता और सुव्यवस्था: पहचान पत्र अनिवार्य होने से मेले की व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और अखाड़ों के बीच समन्वय बेहतर होगा। यह निर्णय अर्धकुंभ और कुंभ मेलों को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विशेष जांच और कड़े नियम: बिना आईडी के नहीं मिलेगा प्रवेश

श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने चेतावनी दी है कि बिना पहचान पत्र के पाए गए भगवाधारियों की विशेष जांच की जाएगी:

  • जांच और सत्यापन: मेले के प्रवेश द्वारों और विभिन्न स्थानों पर साधु-संतों के पहचान पत्रों की जांच की जाएगी। यदि कोई भगवाधारी बिना आईडी के पाया जाता है, तो उसकी पहचान और अखाड़े के बारे में विस्तृत जांच की जाएगी।
  • प्रवेश पर रोक: आवश्यकता पड़ने पर, बिना पहचान पत्र वाले भगवाधारियों को मेले में प्रवेश से रोका जा सकता है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि मेले की गरिमा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

अखाड़ों का समर्थन: अखाड़ा परिषद का निर्णय सर्वमान्य

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के इस निर्णय को सभी 13 अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है। परिषद ने सभी अखाड़ों को अपने साधु-संतों के पहचान पत्र तैयार करने और उन्हें मेले में साथ रखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। अखाड़ों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे कुंभ और अर्धकुंभ मेलों की पवित्रता और सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है।

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