नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील (Glaw Lake) को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (रामसर साइट) का दर्जा मिल गया है। इसके साथ ही यह अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट बन गई है, जबकि देश में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 101 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसकी घोषणा की।
पूर्वी हिमालय क्षेत्र में स्थित ग्लॉ झील कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित एक स्वच्छ मीठे पानी की झील है। यह क्षेत्र जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। झील के आसपास और इसके जलग्रहण क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां तथा 49 प्रकार की ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसकी पारिस्थितिक समृद्धि को दर्शाती हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्लॉ झील को रामसर सूची में शामिल किया जाना जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश में केवल 26 रामसर स्थल थे, जो अब बढ़कर 101 हो गए हैं। यह पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रामसर साइट का दर्जा मिलने से ग्लॉ झील के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इस क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मान्यता से अरुणाचल प्रदेश में आर्द्रभूमि संरक्षण को नई गति मिलेगी और पर्यावरणीय पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
रामसर कन्वेंशन वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य विश्वभर की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनका विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। भारत लगातार अपने आर्द्रभूमि संरक्षण नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और ग्लॉ झील का शामिल होना इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।





