नई दिल्ली/बर्लिन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जर्मनी के दौरे पर गए प्रधानमंत्री ने चांसलर ओलाफ शोल्ज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान विशेष रूप से अरिहा शाह का मामला उठाया। पीएम मोदी ने जर्मन नेतृत्व को भारतीय परिवार की संवेदनाओं और सांस्कृतिक परिवेश से अवगत कराते हुए कहा कि भारत सरकार इस परिवार की हर तरह से मदद करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के सहयोग से नन्हीं अरिहा जल्द ही अपने वतन और अपने माता-पिता के पास वापस लौट सकेगी।
क्या है अरिहा शाह का मामला?
अरिहा शाह का मामला पिछले करीब तीन वर्षों से भारत और जर्मनी के बीच एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा बना हुआ है:
- मामले की शुरुआत: सितंबर 2021 में, जब अरिहा मात्र 7 महीने की थी, जर्मन अधिकारियों (Jugendamt) ने उसे उसके माता-पिता, धारा और भावेश शाह से अलग कर दिया था।
- आरोप: जर्मन प्रशासन का आरोप था कि बच्ची के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार हुआ है, जबकि माता-पिता का कहना है कि वह एक आकस्मिक चोट थी।
- फोस्टर केयर: तब से अरिहा जर्मनी के फोस्टर केयर (पालन-पोषण केंद्र) में रह रही है, और जर्मन अदालत ने माता-पिता की कस्टडी के अधिकार को समाप्त कर दिया था।
प्रधानमंत्री का हस्तक्षेप और कूटनीतिक दबाव
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को उठाने के दूरगामी परिणाम होने की उम्मीद है:
- सांस्कृतिक पहचान का तर्क: भारत लगातार यह दलील दे रहा है कि अरिहा को उसकी भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुसार भारत में ही पालना चाहिए।
- पारिवारिक मदद का भरोसा: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार कानूनी और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर परिवार के साथ खड़ी है।
- चांसलर को संदेश: पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि एक बच्चे का भविष्य उसके अपने परिवेश में सबसे सुरक्षित होता है।
विदेश मंत्रालय की सक्रियता
प्रधानमंत्री की बातचीत के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है:
- नियमित संपर्क: बर्लिन में भारतीय दूतावास लगातार जर्मन अधिकारियों के संपर्क में है ताकि बच्ची को भारत के किसी फोस्टर केयर या उसके रिश्तेदारों को सौंपने का रास्ता साफ हो सके।
- कानूनी लड़ाई: भारत सरकार परिवार को कानूनी सलाह और अदालती कार्यवाही में हर संभव तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।
माता-पिता की उम्मीदें जगीं
पीएम मोदी के इस कदम के बाद अरिहा के माता-पिता ने राहत की सांस ली है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश का मुखिया खुद इस मामले को उठाता है, तो न्याय की उम्मीद कई गुना बढ़ जाती है।
अरिहा शाह का मामला अब केवल एक अदालती लड़ाई नहीं, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच मानवीय संबंधों की परीक्षा बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी के हस्तक्षेप से इस बात की संभावना प्रबल हो गई है कि कानूनी पेचीदगियों को सुलझाकर अरिहा की सुरक्षित घर वापसी का मार्ग जल्द प्रशस्त होगा।





