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अरब सागर की गहराइयों में मिली स्केट मछली की नई प्रजाति, चार दशक से थी अनपहचानी

नई दिल्ली, 2 सितंबर। भारतीय वैज्ञानिकों ने समुद्री जैव विविधता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने ICAR-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से अरब सागर की गहराइयों में स्केट मछली की एक नई प्रजाति की पहचान की है। यह खोज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के डीप ओशन मिशन के तहत किए गए समुद्री सर्वेक्षण के दौरान हुई।

नई प्रजाति को ‘अरबियन स्केट’ (Dipturus dhritiae) नाम दिया गया है। यह केरल तट और वाडगे बैंक क्षेत्र में समुद्र की 400 से 600 मीटर गहराई में पाई गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मछली करीब 1.3 मीटर तक लंबी हो सकती है। इसकी प्रमुख पहचान पूंछ पर कांटेनुमा संरचनाओं की पांच स्पष्ट कतारें हैं।

वैज्ञानिकों ने शारीरिक संरचना के विस्तृत अध्ययन के साथ आनुवंशिक जांच के आधार पर इसे नई प्रजाति के रूप में प्रमाणित किया। आनुवंशिक विश्लेषण में यह अपनी निकटतम ज्ञात प्रजाति ट्रावनकोर स्केट से करीब 3.8 से 4.7 प्रतिशत अलग पाई गई। खास बात यह है कि यह प्रजाति चार दशक से अधिक समय तक वैज्ञानिकों की नजर में तो थी, लेकिन इसकी सही पहचान नहीं हो सकी थी। इसे पहले दूसरी स्केट प्रजाति समझा जाता था।

वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम ZSI की पहली महिला महानिदेशक धृति बनर्जी के सम्मान में रखा है। शोधकर्ताओं के अनुसार गहरे समुद्र का बड़ा हिस्सा अभी भी अनदेखा और कम अध्ययन किया गया है। ऐसे में इस तरह की खोज समुद्री जैव विविधता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों ने गहरे समुद्र में रहने वाली स्केट और अन्य शार्क-रे प्रजातियों के संरक्षण पर भी जोर दिया है। इन जीवों की प्रजनन दर कम होती है और आबादी घटने के बाद उनकी संख्या को सामान्य होने में लंबा समय लगता है। ऐसे में मछली पकड़ने के दौरान अनजाने में इनके पकड़े जाने से इनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ सकता है।

 

 

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