नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते समीकरणों के बीच भारत ने अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बेहद सतर्क और संतुलित रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। नई दिल्ली का मानना है कि समझौता तभी होगा जब वह भारतीय किसानों, स्थानीय उद्योगों और मध्यम वर्ग के हितों के पूरी तरह अनुकूल होगा।
क्यों जल्दबाजी नहीं चाहता भारत?
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार पिछली गलतियों से सबक लेते हुए ‘गुणवत्ता’ को ‘रफ्तार’ से ऊपर रख रही है। अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में कई ऐसे संवेदनशील मुद्दे हैं जहाँ दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। इनमें कृषि बाजार तक पहुंच, डेयरी उत्पाद, वीजा नियम (H-1B) और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) जैसे जटिल विषय शामिल हैं। पीएम मोदी का मानना है कि बिना ठोस घरेलू सुरक्षा के किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को प्रभावित कर सकता है।
क्या है पीएम मोदी का ‘ग्रैंड प्लान’?
प्रधानमंत्री मोदी का विजन इस बार केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उनका मास्टर प्लान निम्नलिखित स्तंभों पर टिका है:
- समान अवसर (Level Playing Field): भारत चाहता है कि व्यापारिक शर्तें ऐसी हों जिससे भारतीय छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को अमेरिकी बाजार में बराबर का मुकाबला करने का मौका मिले।
- सप्लाई चेन लचीलापन: चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत खुद को एक विश्वसनीय वैश्विक सप्लाई चेन हब के रूप में पेश कर रहा है। पीएम मोदी की रणनीति ‘चीन+1’ नीति का लाभ उठाकर अमेरिकी निवेश को भारत में आकर्षित करने की है।
- डिजिटल और सुरक्षा सहयोग: व्यापार को केवल वस्तुओं (Goods) तक सीमित न रखकर, भारत क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (iCET), सेमीकंडक्टर और स्पेस सेक्टर में गहरी साझेदारी चाहता है।
अमेरिकी दबाव और भारत का स्टैंड
वाशिंगटन की ओर से अक्सर भारतीय टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर दबाव बनाया जाता रहा है। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने टैरिफ ढांचे में बदलाव तभी करेगा जब अमेरिका भी भारतीय सेवाओं और पेशेवरों के लिए अपने नियमों में ढील देगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) इस बात पर नजर रखे हुए है कि ट्रेड डील का सीधा लाभ आम भारतीय को मिले, न कि केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों को।
बहुपक्षीय समझौतों पर फोकस
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत फिलहाल केवल अमेरिका पर केंद्रित होने के बजाय यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन और खाड़ी देशों के साथ भी सक्रियता से व्यापार वार्ता कर रहा है। इससे भारत की मोलभाव करने की शक्ति (Bargaining Power) बढ़ी है। पीएम मोदी की रणनीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की है, जहाँ भारत किसी एक देश के दबाव में आए बिना अपने आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखता है।





