वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की दिग्गज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों को एक कड़ा संदेश देते हुए “अल्टीमेटम” जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ये कंपनियां सरकार द्वारा निर्धारित नए सुरक्षा मानकों और डेटा गोपनीयता नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन्हें ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के डेटा को विदेशी ताकतों से सुरक्षित रखना और AI के बढ़ते प्रभाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में लाना है। प्रशासन के इस रुख से सिलिकॉन वैली की टेक कंपनियों में हड़कंप मच गया है।
ट्रंप प्रशासन की मुख्य शर्तें और चिंताएं
व्हाइट हाउस द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में कंपनियों के सामने कई कड़ी शर्तें रखी गई हैं:
- डेटा संप्रभुता: कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिकी उपयोगकर्ताओं का डेटा घरेलू सर्वर पर ही रहे और किसी भी ‘प्रतिकूल देश’ (जैसे चीन या रूस) की पहुंच से बाहर हो।
- एल्गोरिदम ऑडिट: सरकार ने मांग की है कि प्रमुख AI मॉडल्स के पीछे के एल्गोरिदम का सुरक्षा ऑडिट किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका उपयोग दुष्प्रचार या साइबर हमलों के लिए नहीं किया जा रहा है।
- खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग: राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कंपनियों को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ अनिवार्य रूप से डेटा साझा करना होगा।
‘ब्लैकलिस्ट’ होने का क्या होगा असर?
यदि कोई कंपनी इन शर्तों को मानने से इनकार करती है, तो उसे ‘एंटिटी लिस्ट’ (Entity List) में डाल दिया जाएगा:
- सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर रोक: ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को पेंटागन या किसी भी अन्य संघीय एजेंसी के साथ काम करने का मौका नहीं मिलेगा।
- निर्यात प्रतिबंध: इन कंपनियों को भविष्य में उन्नत चिप्स और हार्डवेयर के निर्यात पर पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है।
- निवेश में गिरावट: ब्लैकलिस्ट होने का सीधा असर कंपनी के शेयरों और वैश्विक साख पर पड़ेगा, जिससे उनका विस्तार रुक सकता है।
टेक इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया: ‘नवाचार बनाम नियंत्रण’
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर टेक जगत की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है:
- कंपनियों का तर्क: कई विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक नियमन से अमेरिका AI की वैश्विक रेस में पिछड़ सकता है। उनका तर्क है कि नवाचार (Innovation) के लिए स्वतंत्रता जरूरी है।
- प्रशासन का पक्ष: ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि “बिना नियंत्रण के तकनीक विनाशकारी हो सकती है।” वे इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा मान रहे हैं, जहाँ तकनीक को अमेरिकी हितों के अधीन रहना होगा।




