Saturday, February 14, 2026

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अमेरिका में हेट क्राइम का नया मामला: ‘तुम ठीक हो दोस्त?’ पूछना पड़ा भारी, भारतीय मूल के बिजनेसमैन की गोली मारकर हत्या

वॉशिंगटन/पिट्सबर्ग। अमेरिका में नस्लीय हिंसा और हेट क्राइम की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा मामला पेंसिल्वेनिया राज्य के पिट्सबर्ग शहर का है, जहां भारतीय मूल के एक व्यापारी राकेश एहागाबन (51) की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोपी ने सिर्फ इतना सुनने के बाद—“तुम ठीक हो दोस्त?”—उन्हें प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली दाग दी।

घटना शुक्रवार दोपहर रॉबिन्सन टाउनशिप स्थित एक मोटल के बाहर हुई, जिसे राकेश चलाते थे। वे झगड़ा सुलझाने बाहर निकले थे, लेकिन खुद इस हिंसा के शिकार बन गए। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।

झगड़ा सुलझाने निकले, मौत मिली

पुलिस के अनुसार, 37 वर्षीय स्टेनली यूजीन वेस्ट नामक व्यक्ति होटल की पार्किंग में एक महिला से झगड़ा कर रहा था। शोर सुनकर राकेश बाहर आए और दोनों को शांत कराने लगे। उन्होंने स्टेनली से सामान्य लहजे में पूछा, “क्या तुम ठीक हो दोस्त?”—बस इतना सुनते ही स्टेनली ने बिना कुछ कहे राकेश के सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद आरोपी ने उस महिला पर भी गोली चला दी, जो उसकी झगड़े में शामिल थी। महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पुलिस पर भी चलाई गोली

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने जब ईस्ट हिल्स इलाके में उसे घेरने की कोशिश की, तो उसने पुलिस अधिकारियों पर भी फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि, कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उस पर हत्या, हत्या के प्रयास और पुलिस पर जानलेवा हमला जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

भारतीय समुदाय में आक्रोश

राकेश एहागाबन की हत्या के बाद अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों में गहरा आक्रोश और भय है। समुदाय के नेताओं ने इस घटना को स्पष्ट हेट क्राइम बताते हुए अमेरिकी प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

भारतीय दूतावास ने भी स्थानीय अधिकारियों से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

बढ़ते हेट क्राइम पर चिंता

अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों पर हमलों के मामले तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नस्लीय भेदभाव, सामाजिक तनाव और हथियारों की आसान उपलब्धता ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।

यह घटना एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि क्या अमेरिका में प्रवासी समुदाय अब भी सुरक्षित महसूस कर सकता है, या वहां की सड़कों पर “तुम ठीक हो दोस्त?” जैसी एक साधारण चिंता भी जानलेवा साबित हो सकती है

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