नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा नियमों में किए गए संशोधन का सीधा असर वैश्विक आईटी सेक्टर पर देखने को मिला है। सोमवार को शेयर बाजार में आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। विशेष तौर पर भारत की शीर्ष 10 आईटी कंपनियों के स्टॉक्स में निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
विश्लेषकों का कहना है कि एच-1बी वीजा पर नई शर्तें लागू होने से भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में काम करना और कठिन हो जाएगा। अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों का सबसे बड़ा आउटसोर्सिंग बाजार है, जहां हजारों पेशेवर हर साल इसी वीजा के जरिए सेवाएं देते हैं। वीजा नियमों में सख्ती के बाद कंपनियों की लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट डिले होने की आशंका जताई जा रही है।
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट
सोमवार को कारोबार की शुरुआत से ही आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव बना रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 5 से 7 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो, टेक महिंद्रा, एलटीआई मिंडट्री और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में एक ही दिन में 6 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई।
निवेशकों को भारी नुकसान
टॉप आईटी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में अरबों रुपये की कमी आई। अकेले टीसीएस और इंफोसिस के निवेशकों को कुछ ही घंटों में हजारों करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा।
विशेषज्ञों की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि अमेरिकी वीजा नीतियां और सख्त की गईं तो भारतीय आईटी सेक्टर की विकास दर प्रभावित हो सकती है। कंपनियों को स्थानीय स्तर पर अधिक हायरिंग करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी परिचालन लागत बढ़ जाएगी। इससे आने वाले दिनों में आईटी सेक्टर के मुनाफे और शेयर प्रदर्शन पर दबाव रह सकता है।
सरकार भी नजर बनाए हुए
भारतीय आईटी उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा है कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और सरकार से संवाद कर रहा है, ताकि उद्योग और रोजगार पर नकारात्मक असर को कम किया जा सके।





