वॉशिंगटन। अमेरिका सरकार ने संकेत दिए हैं कि फरवरी 2026 से H-1B वीजा प्रक्रिया में बड़े बदलाव लागू किए जाएंगे। यह कदम विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है, जो अमेरिका में तकनीकी और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम कर रहे हैं या काम करने की योजना बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों में H-1B वीजा के लिए पात्रता मानदंडों को और सख्त किया जाएगा। इसके तहत उच्च तकनीकी दक्षता, अनुभव और शिक्षा की नई न्यूनतम आवश्यकताएं तय की जा सकती हैं। इसके अलावा, वीजा आवंटन प्रक्रिया में भी लॉटरी सिस्टम पर बदलाव और प्राथमिकता निर्धारण के नए नियम लागू होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले पेशेवरों को सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। हालांकि, इस नीति का सीधा असर भारतीय आईटी और इंजीनियरिंग पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय विशेषज्ञ H-1B वीजा के तहत अमेरिका में कार्यरत हैं।
आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि बदलाव से कंपनियों को योग्य कर्मचारियों की भर्ती में कठिनाई हो सकती है, जिससे तकनीकी और स्टार्टअप क्षेत्रों में मानव संसाधन की कमी आ सकती है। वहीं, भारतीय पेशेवरों को वीजा प्रक्रिया में अधिक तैयारी और योजना बनाना पड़ेगा।
अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि नई नीति का उद्देश्य कौशल आधारित चयन प्रणाली को मजबूत करना और अमेरिकी नौकरी बाजार की सुरक्षा करना है। इसके साथ ही, वीजा प्राप्त करने वालों के लिए भी सुरक्षा और रोजगार नियमों में सुधार करने की योजना है।
विशेषज्ञों ने भारतीय पेशेवरों को सलाह दी है कि वे इस बदलाव से पहले अपने दस्तावेज और अनुभव प्रमाण पत्र अपडेट कर लें और नवीनीकृत प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने की तैयारी करें।





