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‘अमेरिका के बिना अधूरा है यूरोप का सुरक्षा कवच’: नाटो चीफ की दो टूक चेतावनी; रूसी खतरे के बीच यूरोपीय देशों को दिखाई हकीकत

ब्रुसेल्स: उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के महासचिव ने यूरोपीय देशों को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए सुरक्षा के मोर्चे पर उनकी निर्भरता की हकीकत बयां की है। नाटो प्रमुख ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर है और वाशिंगटन के सैन्य सहयोग के बिना यूरोपीय देश अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पूरे महाद्वीप में तनाव चरम पर है और अमेरिका में ‘ट्रंप प्रशासन’ की वापसी के बाद नाटो के भविष्य को लेकर बहस छिड़ी हुई है।

नाटो चीफ का बड़ा बयान: हकीकत का आईना

नाटो महासचिव ने एक प्रेस वार्ता के दौरान यूरोपीय संघ (EU) के उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें ‘यूरोपीय रणनीतिक स्वायत्तता’ की बात कही जा रही थी।

  • सैन्य असंतुलन: उन्होंने स्पष्ट किया कि नाटो की कुल सैन्य शक्ति का 70% से अधिक हिस्सा अकेले अमेरिका से आता है। परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Deterrent) से लेकर उन्नत रडार और लॉजिस्टिक सपोर्ट तक, यूरोप आज भी अमेरिका का मोहताज है।
  • अकेला यूरोप असुरक्षित: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका नाटो से पीछे हटता है या अपना समर्थन कम करता है, तो यूरोप के पास रूस जैसी महाशक्ति का मुकाबला करने के लिए न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही एकीकृत कमान।

यूरोपीय देशों की ‘सुस्ती’ पर साधा निशाना

नाटो प्रमुख ने उन यूरोपीय सदस्य देशों की भी आलोचना की जो अब तक अपनी जीडीपी (GDP) का 2% रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए हैं।

  1. बजट में कटौती: कई यूरोपीय देशों ने दशकों से अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण पर ध्यान नहीं दिया, यह मानकर कि अमेरिका हमेशा उनकी रक्षा के लिए खड़ा रहेगा।
  2. हथियारों की कमी: वर्तमान में यूरोप के पास गोला-बारूद और हथियारों का उतना भंडार नहीं है कि वह किसी लंबे समय तक चलने वाले युद्ध को झेल सके।

ट्रंप फैक्टर और यूरोप की चिंता

यह बयान प्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनके नाटो विरोधी रुख के संदर्भ में देखा जा रहा है।

  • ट्रंप की चेतावनी: ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि जो देश रक्षा पर खर्च नहीं करेंगे, अमेरिका उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं देगा।
  • यूरोप में हलचल: नाटो चीफ के इस बयान ने यूरोपीय देशों, विशेषकर जर्मनी और फ्रांस के भीतर हलचल पैदा कर दी है, जो अब अपनी खुद की ‘यूरोपीय सेना’ बनाने के विचार पर जोर दे रहे हैं।

रूस का बढ़ता खतरा

नाटो प्रमुख ने जोर देकर कहा कि रूस न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बना हुआ है।

  • सामूहिक रक्षा (Article 5): उन्होंने याद दिलाया कि नाटो की ताकत ‘सामूहिक रक्षा’ के सिद्धांत में है, लेकिन इसकी रीढ़ की हड्डी अमेरिका ही है। बिना अमेरिका के, नाटो का यह सबसे शक्तिशाली अनुच्छेद कमजोर पड़ जाएगा।

निष्कर्ष: आगे का रास्ता

नाटो चीफ ने यूरोपीय देशों से अपील की है कि वे बयानबाजी के बजाय अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी करें और अमेरिकी सहयोग को बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारियां ईमानदारी से निभाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप को सशक्त होना चाहिए, लेकिन वह सशक्तिकरण अमेरिका के ‘विकल्प’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘पूरक’ के रूप में होना चाहिए।

“यूरोप की सुरक्षा के लिए अमेरिका के साथ अटूट गठबंधन ही एकमात्र विकल्प है। भूगोल नहीं बदलता, और न ही यह हकीकत कि बिना अमेरिकी परमाणु छतरी के यूरोप सुरक्षित है।” — महासचिव, नाटो

 

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