Sunday, November 30, 2025

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अब आपकी सोच से चार्ज होगी बैटरी, देश का पहला ‘न्यूरो स्लाइडिंग मोड कंट्रोलर चार्जर’ तैयार

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ ने एक बार फिर तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। यहां सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. अखिलेश सिंह ने देश का पहला ‘न्यूरो स्लाइडिंग मोड कंट्रोलर चार्जर’ विकसित किया है — एक ऐसी तकनीक जो आपकी सोच के अनुरूप इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को चार्ज करने में सक्षम है।
सुनने में यह विज्ञान-कथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत बन चुकी है। प्रो. अखिलेश के मुताबिक, “अगर आप यह सोचते हैं कि आपकी स्कूटी या कार जल्दी चार्ज हो जाए, तो यह चार्जर आपकी उसी सोच को पहचानकर बैटरी चार्जिंग की प्रक्रिया को उसी हिसाब से संचालित करेगा।”
तीन साल की मेहनत से साकार हुआ सपना
इस क्रांतिकारी डिवाइस को विकसित करने में प्रो. अखिलेश सिंह ने तीन वर्ष का लंबा अनुसंधान कार्य किया। उनकी प्रतिभा और नवाचार क्षमता को देखते हुए भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट को आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। अब प्रो. सिंह इस तकनीक का अमेरिका से पेटेंट कराने की तैयारी में हैं और इसके बाद इसे देश को समर्पित करेंगे।
हर वाहन के लिए उपयोगी और पावरफुल
करीब 20 किलो वजनी यह चार्जर तकनीकी दृष्टि से अत्यंत उन्नत है। यह न सिर्फ इलेक्ट्रिक स्कूटी, बल्कि कार, बस और अन्य वाहनों की बैटरियों को भी तेजी से चार्ज करने में सक्षम है। इसकी सबसे खास बात यह है कि ऊंचाई वाले रास्तों या अधिक लोड की स्थिति में भी बैटरी की पावर कम नहीं होती। यह डिवाइस लीथियम-आयन से लेकर लेड-एसिड तक, सभी प्रकार की बैटरियों के साथ काम कर सकता है।
सोच को पढ़ने वाला चार्जर
इस चार्जर की कार्यप्रणाली का आधार एआई (Artificial Intelligence) आधारित न्यूरॉन रीडिंग तकनीक है। प्रो. अखिलेश बताते हैं कि उन्हें इस डिवाइस की प्रेरणा एक मोबाइल रील से मिली थी। जैसे एआई आपकी रुचियों को पहचानकर आपको वैसी ही सामग्री दिखाता है, वैसे ही यह ‘न्यूरो स्लाइडिंग मोड कंट्रोलर’ आपकी सोच और माइंड कमांड को पढ़कर बैटरी चार्जिंग को नियंत्रित करता है।
सीमांत क्षेत्र से नवाचार की मिसाल
सीमांत क्षेत्र में रहकर इस स्तर का नवाचार करना न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। प्रो. अखिलेश ने यह साबित कर दिया है कि सतत प्रयास, प्रगतिशील सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसी भी सीमा को पार किया जा सकता है।
उनका कहना है, “यह तकनीक आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में क्रांति लाएगी। सोच और विज्ञान का संगम अब वास्तविकता बन चुका है।”
उत्तराखंड के इस अभूतपूर्व आविष्कार ने न केवल राज्य का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि भारत के युवा वैज्ञानिक भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान अपनी ही मिट्टी से खोजने में सक्षम हैं।

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