कंपाला/नैरोबी: दुनिया की सबसे लंबी अवधि तक राज करने वाले नेताओं में शुमार युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 81 वर्ष की आयु में भी मुसेवेनी का युगांडा पर एकछत्र राज कायम है। उनकी जीवनशैली किसी सम्राट की याद दिलाती है—उनके पास 10 करोड़ रुपये की कीमत वाली अत्याधुनिक और बुलेटप्रूफ मर्सिडीज बेंज कारों का बेड़ा है। इतना ही नहीं, उनकी सुरक्षा के लिए 10,000 विशेष प्रशिक्षित कमांडो की एक निजी फौज चौबीसों घंटे तैनात रहती है। मुसेवेनी की निजी संपत्ति में एक लाख से अधिक गायें शामिल हैं, जिन्हें वे अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं। 1986 में सत्ता संभालने के बाद से, उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन आज भी उनकी पकड़ देश के सैन्य और राजनीतिक तंत्र पर अटूट बनी हुई है।
शक्ति और सुरक्षा का अभेद्य किला
मुसेवेनी की सुरक्षा व्यवस्था को अफ्रीका में सबसे मजबूत माना जाता है:
- निजी कमांडो यूनिट: ‘स्पेशल फोर्सेज कमांड’ (SFC) के नाम से जानी जाने वाली यह फौज सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करती है। इसमें हजारों ऐसे जवान हैं जो आधुनिक हथियारों और इजरायली तकनीक से लैस हैं।
- बख्तरबंद गाड़ियां: राष्ट्रपति की मर्सिडीज केवल एक लग्जरी कार नहीं है, बल्कि यह रासायनिक हमलों और धमाकों को झेलने में सक्षम एक चलता-फिरता किला है।
- सैन्य नियंत्रण: 40 वर्षों के शासन के दौरान उन्होंने सेना के हर महत्वपूर्ण पद पर अपने वफादारों को तैनात किया है, जिससे तख्तापलट की गुंजाइश खत्म हो गई है।
पशुपालन: सत्ता और संस्कृति का अनूठा मेल
मुसेवेनी खुद को एक गौरवशाली ‘चरवाहा’ कहलाना पसंद करते हैं:
- एक लाख गायों का मालिक: वे युगांडा की पारंपरिक ‘अंकोले’ नस्ल की गायों के शौकीन हैं। उनके पास कई विशाल फार्म हैं जहाँ एक लाख से अधिक गायें पाली जाती हैं।
- कूटनीति में गायों का महत्व: मुसेवेनी अक्सर विदेशी मेहमानों को अपने फार्म हाउस पर ले जाते हैं और उन्हें गायें उपहार में देते हैं, जो उनकी संस्कृति में सम्मान का प्रतीक है।
- ग्रामीण जुड़ाव: पशुपालन के प्रति उनका प्रेम उन्हें देश की ग्रामीण आबादी से जोड़ता है, जो उनके वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा है।
चार दशकों का राजनीतिक सफर
मुसेवेनी का सत्ता तक पहुँचने और बने रहने का सफर काफी विवादास्पद रहा है:
- क्रांति से राष्ट्रपति तक: 1986 में एक विद्रोही नेता के रूप में उन्होंने तत्कालीन सरकार को हटाकर सत्ता हासिल की थी। तब उन्होंने वादा किया था कि वे लोकतंत्र बहाल करेंगे, लेकिन वे खुद ही पद पर जमे रहे।
- संविधान में बदलाव: अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए उन्होंने कई बार संविधान में संशोधन किए, जिनमें राष्ट्रपति पद के लिए आयु सीमा और कार्यकाल की सीमा को हटाना शामिल है।
- विपक्ष का दमन: उन पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वे विपक्षी नेताओं, जैसे कि लोकप्रिय गायक और राजनीतिज्ञ बॉबी वाइन, की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग करते हैं।
निष्कर्ष: लोकतंत्र बनाम तानाशाही की बहस
योवेरी मुसेवेनी का शासन युगांडा के लिए स्थिरता तो लाया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे लोकतंत्र का गला घोंटने के रूप में देखा जाता है। 81 साल की उम्र में भी 10 हजार कमांडो और अपार धन-दौलत के बीच उनका राज करना यह दर्शाता है कि सत्ता का मोह कितना गहरा हो सकता है। दुनिया अब यह देख रही है कि आने वाले समय में वे अपनी विरासत किसे सौंपते हैं—उनके बेटे मुहुजी काइनेरुगाबा को पहले ही सेना में शीर्ष पद देकर इसका संकेत दिया जा चुका है।





