Saturday, February 14, 2026

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अक्तूबर में आसमान सजाएगा दुर्लभ खगोलीय नजारा: सुपरमून, उल्कापात और बुध-शुक्र की ‘नृत्यलीला’; 8–10 साल में आता है ऐसा संयोग

नई दिल्ली। आने वाला अक्तूबर महीना खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस महीने आसमान में एक नहीं बल्कि कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का संगम देखने को मिलेगा। इनमें सुपरमून, उलकापात (मेटियोर शावर) और बुध-शुक्र की दुर्लभ युति प्रमुख हैं। खगोलविदों के अनुसार, ऐसा अनोखा संयोग लगभग 8 से 10 वर्षों में एक बार ही देखने को मिलता है।
भारतीय खगोल विज्ञान संस्थान (IIA) के विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्टूबर के पहले सप्ताह में सुपरमून दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई देगा, क्योंकि वह पृथ्वी के सबसे नजदीक बिंदु (पेरिजी) पर होगा। यह नजारा रात 8 बजे से मध्यरात्रि तक साफ आसमान वाले इलाकों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।

इसके बाद मध्य अक्तूबर में उल्कापात (ओरायनिड मेटियोर शावर) का दृश्य भी रात के आकाश को रोशन करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दौरान प्रति घंटे 15 से 20 उल्काएं देखी जा सकेंगी। यह घटना मुख्य रूप से हैली के धूमकेतु के अवशेषों से जुड़ी है, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय जल उठते हैं और आसमान में चमकीली लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं।
अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में एक और आकर्षक दृश्य देखने को मिलेगा, जब बुध और शुक्र ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब आते हुए एक प्रकार की ‘नृत्यलीला’ प्रस्तुत करेंगे। यह युति सूर्योदय से ठीक पहले पूर्वी क्षितिज पर दिखाई देगी। खगोल विशेषज्ञों के अनुसार, इसे बिना किसी विशेष उपकरण के नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा।
खगोल विज्ञानियों ने सलाह दी है कि इन घटनाओं को देखने के लिए शहरों की तेज रोशनी से दूर खुले आसमान वाले क्षेत्रों का चयन करें। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा दुर्लभ संयोग—जब सुपरमून, उल्कापात और ग्रहों की युति एक ही महीने में हों—लगभग एक दशक में एक बार ही घटित होता है, जो इस अक्तूबर को और भी खास बना देगा।

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