नई दिल्ली।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अभियान को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसरो प्रमुख ने मंगलवार को बताया कि संगठन वर्ष 2028 में चंद्रयान-4 मिशन को लॉन्च करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसके साथ ही इसरो अपने अंतरिक्ष यान निर्माण और प्रक्षेपण क्षमता को अगले कुछ वर्षों में तीन गुना बढ़ाने की योजना पर भी गंभीरता से काम कर रहा है।
इसरो प्रमुख के अनुसार, चंद्रयान-4 मिशन तकनीकी दृष्टि से और भी उन्नत होगा। इसमें न केवल चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग और वैज्ञानिक प्रयोग शामिल होंगे, बल्कि मिशन का एक बड़ा उद्देश्य चंद्रमा से नमूनों को वापस पृथ्वी पर लाना भी होगा। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को अगले स्तर पर ले जाने वाला साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता ने वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत किया है और अब संगठन अगला कदम और अधिक आत्मविश्वास के साथ उठाने को तैयार है।
इसरो प्रमुख ने आगे कहा कि आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट एक साथ चलेंगे। बढ़ते मिशनों के मद्देनजर इसरो अपने उत्पादन ढांचे का विस्तार कर रहा है। विभिन्न अंतरिक्ष केंद्रों पर नए उपकरण, स्वचालित प्रोडक्शन लाइनें और उन्नत परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्पेस सेक्टर की कंपनियों के साथ साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि अंतरिक्ष यान निर्माण की गति तीन गुना तक बढ़ाई जा सके और अधिक मिशन समयबद्ध ढंग से पूरे किए जा सकें।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भारत मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर और भी बड़े अभियानों की तैयारी कर रहा है। साथ ही मंगल, शुक्र और गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े मिशनों पर भी विस्तृत योजना बनाई जा रही है।
इसरो प्रमुख के बयान से साफ है कि आने वाले चार वर्षों में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम नई तकनीक, अधिक प्रक्षेपण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ और भी तेज रफ्तार पकड़ने जा रहा है।





