ह्यूस्टन/वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तैनात एक अंतरिक्ष यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया है। अंतरिक्ष इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है जब किसी सक्रिय मिशन को बीच में ही रोककर किसी यात्री को केवल स्वास्थ्य कारणों से आपातकालीन स्थिति में धरती पर वापस लाया गया है। नासा ने चालक दल की सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए बीमार यात्री के नाम और बीमारी की प्रकृति का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस घटना ने भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है।
आपातकालीन वापसी का घटनाक्रम
यह पूरा ऑपरेशन बेहद गोपनीय और तीव्र गति से संचालित किया गया:
- अचानक स्वास्थ्य गिरावट: नासा के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री ने ISS पर रहते हुए असहजता और बीमारी के लक्षणों की शिकायत की थी। स्टेशन पर मौजूद डॉक्टरों ने शुरुआती परामर्श दिया, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर वापसी का निर्णय लिया गया।
- स्पेसएक्स कैप्सूल का उपयोग: बीमार यात्री को स्पेसएक्स के ‘क्रू ड्रैगन’ कैप्सूल के जरिए सुरक्षित रूप से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराया गया और समुद्र में सफलतापूर्वक लैंडिंग (स्प्लैशडाउन) कराई गई।
- अस्पताल में भर्ती: धरती पर उतरते ही यात्री को तुरंत फ्लोरिडा के एक विशेष चिकित्सा केंद्र में ले जाया गया, जहाँ विशेषज्ञों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
नासा का कड़ा फैसला: मिशन रद्द
नासा ने जोखिम कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं:
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: नासा ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष यात्री का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। मिशन को जारी रखना न केवल उस यात्री के लिए बल्कि पूरे स्टेशन के लिए जोखिम भरा हो सकता था।
- सहयोगियों की वापसी: बीमार यात्री के साथ उनके कुछ अन्य साथी भी वापस लौटे हैं, जिससे स्टेशन पर वर्तमान शोध कार्यों की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हुई है।
- गहन जांच: एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह बीमारी अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) के कारण हुई है या यह कोई पूर्व-मौजूद स्थिति थी।
अंतरिक्ष में चिकित्सा चुनौतियां
यह घटना दर्शाती है कि पृथ्वी से दूर चिकित्सा सहायता प्रदान करना कितना जटिल है:
- सीमित संसाधन: ISS पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था तो है, लेकिन बड़ी बीमारियों या सर्जरी के लिए वहां पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
- माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव: अंतरिक्ष में इंसानी शरीर अलग तरह से व्यवहार करता है। वहां मांसपेशियों में कमजोरी, हड्डियों का घनत्व कम होना और रक्त संचार में बदलाव जैसी समस्याएं आम हैं, जो किसी भी बीमारी को गंभीर बना सकती हैं।
निष्कर्ष: भविष्य के मिशनों के लिए सबक
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना नासा के आगामी ‘आर्टेमिस’ (चंद्रमा मिशन) और ‘मंगल’ मिशनों के लिए एक बड़ा सबक है। यदि मंगल ग्रह की यात्रा के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो वहां से वापसी में महीनों का समय लग सकता है। नासा अब अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और उनके ‘इन-फ्लाइट’ मेडिकल सपोर्ट सिस्टम को और अधिक उन्नत बनाने पर विचार कर रहा है। फिलहाल, शेष अंतरिक्ष यात्री ISS पर सुरक्षित हैं और नियमित संचालन जारी है।





