हरिद्वार/देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर उठ रही आवाजों के बीच अब राजनीति और आस्था का एक नया अध्याय जुड़ गया है। ज्वालापुर विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने इस प्रकरण को लेकर एक भावुक और कठोर संकल्प लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि जब तक उत्तराखंड के ‘न्याय के देवता’ कहे जाने वाले भगवान गोल्ज्यू अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं दिला देते, तब तक वे अपने शरीर पर भगवा वस्त्र धारण नहीं करेंगे।
न्याय की चौखट पर आस्था की गुहार
पूर्व विधायक सुरेश राठौर, जो अक्सर भगवा चोले में नजर आते हैं, ने अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात के बाद यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटी के साथ जो क्रूरता हुई है, उसने पूरे समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। उन्होंने अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध चितई गोल्ज्यू मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि जब सांसारिक व्यवस्थाओं से न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ने लगती है, तब भक्त न्याय के देवता की शरण में जाता है।
त्याग के माध्यम से विरोध का स्वर
राठौर ने स्पष्ट किया कि उनका भगवा वस्त्र त्यागना एक तरह का ‘प्रायश्चित’ और ‘आंदोलन’ है। उन्होंने कहा, “भगवा त्याग और तपस्या का प्रतीक है। जब हमारी बेटी को अब तक पूर्ण न्याय नहीं मिला और अपराधी पूरी तरह बेनकाब नहीं हुए, तो ऐसे में मेरा यह सात्विक स्वरूप मुझे कचोटता है।” उन्होंने कसम खाई है कि वे साधारण सफेद वस्त्र धारण करेंगे और तब तक भगवा वापस नहीं पहनेंगे जब तक अंकिता के हत्यारों को उनके किए की अंतिम सजा नहीं मिल जाती।
सरकार और जांच प्रणाली पर सवालिया निशान
हालांकि सुरेश राठौर सत्ताधारी दल से जुड़े रहे हैं, लेकिन उनके इस कदम को सिस्टम के प्रति एक मौन विरोध के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिजनों का दर्द असहनीय है और वे एक नागरिक के नाते उनके इस संघर्ष में साथ खड़े हैं। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े ‘वीआईपी’ चेहरे का पर्दाफाश होना चाहिए ताकि देवभूमि की बेटियों का विश्वास कानून पर बना रहे।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना संकल्प
सुरेश राठौर के इस ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह एक साहसिक और धार्मिक निर्णय है, जबकि विपक्षी इसे भावनात्मक राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तराखंड की संस्कृति में गोलू देवता को न्याय का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है और लोग वहां अपनी अर्जी लगाकर न्याय की गुहार लगाते हैं।





