देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें सीबीआई (CBI) जांच पर भी भरोसा नहीं है, क्योंकि जांच एजेंसियों का राजनीतिकरण हो चुका है।
“न्याय की राह में रोड़ा बन रही सरकार”
राजधानी में मीडिया से मुखातिब होते हुए कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के बजाय सरकार रसूखदारों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी मुख्य दोषियों और पर्दे के पीछे छिपे ‘वीआईपी’ (VIP) के नामों का खुलासा न होना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। सैलजा के अनुसार, उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
सीबीआई जांच पर अविश्वास का कारण
कुमारी सैलजा ने अपने बयान में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्ष को दबाने और खास लोगों को बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र नहीं होगी, तब तक अंकिता के परिवार को न्याय मिलना असंभव है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निगरानी उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए।
‘वीआईपी’ के नाम पर घेरा
कांग्रेस प्रभारी ने प्रदेश सरकार पर हमला जारी रखते हुए कहा कि अंकिता के माता-पिता लंबे समय से उस ‘वीआईपी’ का नाम उजागर करने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए उनकी बेटी पर दबाव बनाया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “डबल इंजन” की सरकार इस नाम को छिपाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता इसका जवाब आने वाले चुनावों में देगी।
कांग्रेस का देशव्यापी आंदोलन का संकेत
कुमारी सैलजा ने संकेत दिया कि अंकिता भंडारी का मुद्दा केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सुरक्षा से जुड़ा एक राष्ट्रीय विषय है। कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी ताकि देशभर में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों और उन्हें मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ एक जनमत तैयार किया जा सके।





