ऋषिकेश/यमकेश्वर:अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला। शनिवार को बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्थानीय विधायक रेणु बिष्ट के आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मामले में ‘वीआईपी’ के नाम का खुलासा करने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने में विफल रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन का मुख्य घटनाक्रम
- भारी पुलिस बल की तैनाती: प्रदर्शन की पूर्व सूचना मिलते ही प्रशासन ने विधायक आवास से काफी पहले बैरिकेडिंग लगा दी थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े।
- तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की: जैसे ही कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेडिंग के पास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। कार्यकर्ता लगातार सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे।
- धरना-प्रदर्शन: पुलिस द्वारा रोके जाने पर आक्रोशित कांग्रेसी वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जघन्य हत्याकांड के सबूतों को मिटाने में सत्ताधारी दल के लोगों की संलिप्तता रही है और विधायक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कांग्रेस के मुख्य आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए निम्नलिखित बिंदु उठाए:
- वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग: कांग्रेस का कहना है कि वह कौन ‘वीआईपी’ था जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था, इसका नाम अब तक गुप्त क्यों रखा गया है?
- विधायक की भूमिका पर सवाल: कार्यकर्ताओं ने यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद जिस तरह से रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाया गया, वह साक्ष्यों को नष्ट करने की एक साजिश थी।
- न्याय में देरी: हत्याकांड को लंबा समय बीत जाने के बाद भी अंकिता के माता-पिता को न्याय न मिलने पर गहरा रोष प्रकट किया गया।
प्रशासन का रुख
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को विधायक आवास तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत करने का प्रयास किया और अंततः ज्ञापन लेकर उन्हें वहां से हटाया।





