देहरादून/पौड़ी: अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और विपक्ष को एक बार फिर सरकार को घेरने का मुद्दा मिल गया है। मामले में संदिग्ध मानी जा रही अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जब पुलिस पूछताछ कर रही थी, तब वहां सत्ताधारी भाजपा की एक महिला नेता की मौजूदगी की खबर सामने आई है। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक गलियारों तक यह सवाल उठने लगा है कि क्या जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
पूछताछ कक्ष में भाजपा नेता की उपस्थिति: क्या है मामला?
अंकिता भंडारी मामले में महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही अभिनेत्री उर्मिला सनावर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। नियमों के मुताबिक, ऐसी पूछताछ गोपनीय और केवल जांच अधिकारियों की उपस्थिति में होनी चाहिए।
- तस्वीरें और गवाह: स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल सूचनाओं के अनुसार, पूछताछ के समय भाजपा की एक वरिष्ठ महिला पदाधिकारी वहां मौजूद थीं।
- प्रभाव डालने का आरोप: परिजनों और अंकिता के समर्थकों का आरोप है कि सत्ता पक्ष की नेता की मौजूदगी का उद्देश्य अभिनेत्री को मानसिक सहारा देना या पुलिस पर दबाव बनाकर जांच की दिशा को मोड़ना हो सकता है।
विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का हमला
इस खबर के बाहर आते ही अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है:
- जांच की पवित्रता पर सवाल: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर सत्ताधारी दल के नेता संदिग्धों के साथ पूछताछ के दौरान मौजूद रहेंगे, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
- ‘वीआईपी’ को बचाने की कोशिश: विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार शुरू से ही इस मामले में संलिप्त सफेदपोश ‘वीआईपी’ को बचाने का प्रयास कर रही है और यह घटना उसी कड़ी का हिस्सा है।
अधिकारियों का पक्ष और तकनीकी चुनौतियां
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन बैकफुट पर है। अधिकारियों से जब इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने कहा:
- नियमों का हवाला: पुलिस ने कहा कि किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को पूछताछ का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं है।
- जांच का आश्वासन: अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि किसी नेता ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है, तो उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
- नार्को टेस्ट की तैयारी: पुलिस का कहना है कि वे तकनीकी साक्ष्यों और आगामी नार्को टेस्ट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि कोई भी दोषी बच न सके।
परिजनों का अविश्वास और न्याय की मांग
अंकिता के पिता ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि “हमें पहले से ही अंदेशा था कि रसूखदार लोग जांच को प्रभावित करेंगे। पूछताछ के दौरान भाजपा नेता का वहां होना हमारे संदेह को पुख्ता करता है।” उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले नेताओं पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष: सुलगते सवाल
यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि उत्तराखंड की साख का सवाल बन गया है। क्या पुलिस प्रशासन इस दबाव से मुक्त होकर अंकिता को न्याय दिला पाएगा? भाजपा नेता की मौजूदगी के पीछे का वास्तविक कारण क्या था? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा तय करेंगे।





