Top 5 This Week

Related Posts

होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए बड़ी राहत: 20 हजार टन एलपीजी लेकर निकला आठवां जहाज ‘ग्रीन आशा’

नई दिल्ली/दुबई। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर एक राहत भरी खबर आई है। ओमान और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों के बाद, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग से भारत आने वाला आठवां जहाज ‘ग्रीन आशा’ (Green Asha) सफलतापूर्वक निकल चुका है। यह विशाल टैंकर अपने साथ 20 हजार टन लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत के तटों की ओर बढ़ रहा है।

तनावपूर्ण जलमार्ग से सुरक्षित निकासी

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों के बीच, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर वैश्विक बाजार में भारी चिंता बनी हुई थी। ऐसे में ‘ग्रीन आशा’ का इस क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

  • आठवां सफल अभियान: ‘ग्रीन आशा’ उन चुनिंदा जहाजों में शामिल है जिन्हें हालिया गतिरोध के बाद इस मार्ग से गुजरने की अनुमति या सुरक्षित रास्ता मिला है। यह भारत के लिए एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने की दिशा में आठवां सफल प्रयास है।
  • 20 हजार टन का कार्गो: यह जहाज करीब 20 हजार टन एलपीजी लेकर आ रहा है, जो घरेलू ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक जीत

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित निकलना केवल एक लॉजिस्टिक सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत की प्रभावी विदेश नीति और कूटनीतिक संबंधों का परिणाम है।

“होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्र से भारत के जहाजों का निरंतर निकलना यह दर्शाता है कि भारत ने सभी पक्षों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित प्रस्थान घरेलू बाजार में रसोई गैस की कीमतों और उपलब्धता को स्थिर रखने में मदद करेगा।”

बाजार पर प्रभाव: घरेलू किल्लत की आशंका होगी कम

पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जो उछाल देखा जा रहा था, उस बीच इस खेप का भारत पहुँचना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

  • कीमतों में स्थिरता: एलपीजी की इस बड़ी खेप से देश के भीतर गैस की किल्लत होने की संभावना कम हो जाएगी, जिससे खुदरा कीमतों पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
  • निगरानी जारी: भारतीय नौसेना और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां ‘ग्रीन आशा’ के मार्ग पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि वह बिना किसी बाधा के भारतीय बंदरगाह तक पहुँच सके।

होर्मुज संकट के बीच भारत की यह सक्रियता दिखाती है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए हर संभव कूटनीतिक और सामरिक विकल्प का उपयोग कर रहा है।

Popular Articles