वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत टोल वसूलने के प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहरा गया है। समुद्री कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी देश द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा शुल्क लगाया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के मूल सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए उपयोग होने वाले जलडमरूमध्यों से जहाजों के निर्बाध आवागमन का अधिकार सुरक्षित है। ऐसे में किसी देश द्वारा केवल मार्ग से गुजरने के लिए शुल्क लगाने का कानूनी आधार कमजोर माना जाता है, जब तक कि उसके बदले कोई विशिष्ट सेवा उपलब्ध न कराई जाए।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और तेल की कीमतों पर व्यापक असर डाल सकता है।
ट्रंप के प्रस्ताव के बाद कई विशेषज्ञों और सहयोगी देशों ने भी इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इस तरह का कदम वैश्विक समुद्री व्यापार में अनिश्चितता बढ़ा सकता है और क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर सकता है। आलोचना के बीच बाद में ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव से पीछे हटने के संकेत भी दिए।
उधर, ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके लिए “रेड लाइन” है और किसी भी बाहरी नियंत्रण या हस्तक्षेप का विरोध किया जाएगा। मौजूदा हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है।





