नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक परिदृश्य और बढ़ते सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका ने रक्षा सहयोग को और मजबूती देने का संकल्प दोहराया है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्थिरता, स्वतंत्र नौवहन और नियम–आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए वे मिलकर काम करेंगे। इसी दिशा में संयुक्त सैन्य अभ्यासों की संख्या और दायरा बढ़ाने पर सहमति बनी है।
उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और अमेरिका के रक्षा अधिकारियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की। वार्ता में यह माना गया कि क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक साझेदारी, अंतर–संचालन क्षमता और साझा सैन्य प्रशिक्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों देशों की नौसेनाएँ नियमित रूप से समुद्री सुरक्षा, एंटी–पायरेसी ऑपरेशन, पनडुब्बी रोधी प्रशिक्षण और हवाई निगरानी से जुड़े संयुक्त अभ्यासों में भाग लेंगी। इसके साथ ही आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के स्तर पर त्रि-सेवा अभ्यासों का विस्तार भी एजेंडे का हिस्सा रहा।
अमेरिका ने हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका को “स्थिरता का स्तंभ” बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में भारत की मजबूती पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं भारत ने भी साझा मूल्यों और सामरिक हितों के आधार पर सहयोग बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकियाँ केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं, बल्कि रक्षा तकनीक, इंटेलिजेंस साझेदारी और समुद्री निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार की दिशा में बड़ा कदम हैं। इससे न केवल दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच एक मजबूत सुरक्षा संतुलन स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
दोनों देशों ने कहा कि आने वाले महीनों में नए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी, जो क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को और अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाएंगे।





