हैदराबाद/नलगोंडा: तेलंगाना में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों के बाद एक बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। चुनाव में शिकस्त झेलने वाले कई उम्मीदवार अब उन मतदाताओं के दरवाजे खटखटा रहे हैं, जिन्हें उन्होंने वोट पाने के लिए कथित तौर पर नकदी, शराब और महंगे उपहार बांटे थे। हार से बौखलाए इन उम्मीदवारों का तर्क है कि जब मतदाताओं ने उन्हें वोट ही नहीं दिया, तो उन्हें दिए गए ‘गिफ्ट’ और ‘कैश’ रखने का कोई हक नहीं है। राज्य के कई गांवों में अब हारने वाले पक्ष और ग्रामीणों के बीच इस ‘रिकवरी’ को लेकर विवाद और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
कैसे हो रही है ‘वसूली’?
ग्रामीण इलाकों से आ रही खबरों के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के अगले ही दिन से कई पूर्व उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों के साथ उन घरों का दौरा शुरू कर दिया है जहाँ उन्होंने भारी निवेश किया था:
- कैश की वापसी: उम्मीदवारों का दावा है कि उन्होंने प्रति वोट के हिसाब से हजारों रुपये बांटे थे। अब वे ग्रामीणों से वह पैसा वापस मांग रहे हैं या बदले में उतनी ही कीमत का अनाज या सामान देने का दबाव बना रहे हैं।
- उपहारों का हिसाब: चुनाव से पहले बांटी गई साड़ियां, चांदी के सिक्के, और प्रेशर कुकर जैसे सामान भी वापस मांगे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें उम्मीदवार और ग्रामीण आपस में बहस करते दिख रहे हैं।
ग्रामीणों का विरोध: “क्या गारंटी कि हमने वोट नहीं दिया?”
उम्मीदवारों की इस मांग से ग्रामीण आक्रोशित हैं और उन्होंने इसे अपमानजनक बताया है:
- गोपनीय मतदान का तर्क: ग्रामीणों का कहना है कि मतदान गुप्त होता है, ऐसे में उम्मीदवार यह कैसे तय कर सकते हैं कि किसी विशेष परिवार ने उन्हें वोट नहीं दिया।
- जबरन वसूली का आरोप: कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि हारने वाले उम्मीदवार उन्हें धमकियां दे रहे हैं और जबरन उनके घरों में घुसकर सामान वापस ले जा रहे हैं।
चुनाव आयोग और पुलिस की चेतावनी
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है:
- कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में वोट के बदले पैसा देना और अब उसे वापस मांगना, दोनों ही गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे उम्मीदवारों के खिलाफ आईपीसी (IPC) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
- निगरानी में गांव: नलगोंडा, खम्मम और निजामाबाद जैसे जिलों में जहाँ ऐसे मामले अधिक सामने आए हैं, वहां पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की हिंसक झड़प को रोका जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारतीय चुनावी राजनीति के उस काले पक्ष को उजागर करती है जहाँ लोकतंत्र को ‘व्यापार’ समझ लिया गया है। उम्मीदवारों का मानना है कि उन्होंने वोट ‘खरीदे’ थे, और जब सौदा पूरा नहीं हुआ, तो वे अपना ‘निवेश’ वापस मांग रहे हैं।





