मुंबई।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने जरांगे पाटिल के नेतृत्व वाले हालिया प्रदर्शन पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा और आयोजकों ने प्रशासन द्वारा तय की गई सभी शर्तों का उल्लंघन किया।
हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति की पीठ ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार तभी तक मान्य है जब तक इसकी आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को ठेस न पहुंचे। अदालत ने कहा कि जरांगे पाटिल और उनके समर्थकों के आंदोलन में नियमों का पालन नहीं किया गया और इसके कारण स्थानीय लोगों को असुविधा झेलनी पड़ी।
अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसे आंदोलनों की अनुमति देते समय सभी शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा कि अगर प्रदर्शनकारी नियम तोड़ते हैं तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि मराठा आरक्षण को लेकर जलालामंडल और अन्य जिलों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। जरांगे पाटिल लंबे समय से इस आंदोलन का चेहरा बने हुए हैं और उनके नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। हालांकि, प्रशासन ने आंदोलन के लिए कुछ शर्तें तय की थीं, जिनमें यातायात बाधित न करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना शामिल था।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद मराठा आंदोलन पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर आंदोलनकारी इसे अपनी मांगों को दबाने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं विपक्ष ने सरकार से इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी- जरांगे के नेतृत्व वाला प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं, सभी शर्तों को तोड़ा





