Thursday, March 5, 2026

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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दो मतदाता सूचियों में नाम होने पर पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उन प्रत्याशियों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है जिनके नाम ग्राम पंचायत और नगर निकाय—दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। कोर्ट ने इसे पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन माना है और कहा है कि ऐसे प्रत्याशी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक कुमार मेहरा की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिकाकर्ता शक्ति सिंह बर्त्वाल ने याचिका में कहा था कि हरिद्वार को छोड़कर राज्य के अन्य 12 जिलों में ऐसे कई प्रत्याशी हैं जिनके नाम दोनों प्रकार की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं, जिससे नामांकन प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न हो रही है।
याचिका में यह भी कहा गया कि अलग-अलग जगह नाम होना आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है और यह पंचायती राज अधिनियम की धारा 9(6) व 9(7) का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने पूर्व में राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर इस पर कार्रवाई की मांग की थी।
कोर्ट ने चुनाव में नहीं किया हस्तक्षेप, आदेश भविष्य के लिए प्रभावी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए चुनाव प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। हालांकि, भविष्य में ऐसे मामलों पर यह आदेश प्रभावी रहेगा।
स्पष्टीकरण को लेकर मतभेद
फैसले के बाद प्रत्याशियों में संशय की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि याचिकाकर्ता और राज्य सरकार के अधिवक्ता आदेश की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं।
आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने कहा कि, “यह आदेश मौजूदा चुनावों पर लागू नहीं होगा, लेकिन भविष्य में प्रभावी रहेगा। आयोग विधिक पहलुओं पर विचार करेगा।”
वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने कहा, “कोर्ट के आदेश के बाद दो मतदाता सूचियों में नाम वाले प्रत्याशी चुनाव लड़ने के अयोग्य हो गए हैं। अगर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो यह न्यायालय की अवमानना होगी।”
अब इस मामले में निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

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