हल्द्वानी: शहर की सड़कों और गलियों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से निजात दिलाने के लिए हल्द्वानी नगर निगम ने एक बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम प्रशासन ने कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन और उनके संरक्षण के लिए एक आधुनिक डॉग शेल्टर बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर शासन को भेज दी गई है। इस शेल्टर होम में एक साथ 200 से अधिक कुत्तों को रखने की क्षमता होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल सड़कों को सुरक्षित बनाना है, बल्कि कुत्तों के प्रति क्रूरता को रोककर उनका उचित टीकाकरण और नसबंदी सुनिश्चित करना भी है।
कैसा होगा हल्द्वानी का नया डॉग शेल्टर?
नगर निगम द्वारा प्रस्तावित यह शेल्टर होम आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें निम्नलिखित व्यवस्थाएं की जाएंगी:
- क्षमता और डिजाइन: शेल्टर में 200 कुत्तों के लिए अलग-अलग केबिन और घूमने के लिए खुला क्षेत्र होगा। बीमार और आक्रामक कुत्तों के लिए आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की जाएगी।
- अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर: कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) के लिए शेल्टर के भीतर ही एक हाई-टेक ऑपरेशन थिएटर बनाया जाएगा, जहाँ पशु चिकित्सक नियमित रूप से सर्जरी कर सकेंगे।
- मेडिकल वार्ड और फार्मेसी: घायल या बीमार कुत्तों के उपचार के लिए एक समर्पित मेडिकल यूनिट होगी, जहाँ दवाओं और प्राथमिक चिकित्सा की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
- किचन और फीडिंग एरिया: कुत्तों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने के लिए एक आधुनिक रसोईघर का निर्माण भी डीपीआर में शामिल है।
कुत्तों के आतंक से मिलेगी मुक्ति
पिछले कुछ महीनों में हल्द्वानी के विभिन्न वार्डों से डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) और कुत्तों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की शिकायतें बढ़ी थीं:
- सड़क सुरक्षा: रात के समय सड़कों पर कुत्तों के झुंड के कारण दुपहिया वाहन चालक अक्सर हादसों का शिकार हो जाते हैं। शेल्टर बनने से मुख्य सड़कों पर इनकी संख्या कम होगी।
- रेबीज नियंत्रण: शेल्टर में लाए जाने वाले हर कुत्ते का अनिवार्य टीकाकरण किया जाएगा, जिससे शहर में रेबीज फैलने का खतरा न्यूनतम हो जाएगा।
- वैज्ञानिक नसबंदी: नगर निगम का लक्ष्य है कि कुत्तों की आबादी को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जाए, जिसके लिए नसबंदी अभियान को इस शेल्टर के माध्यम से गति दी जाएगी।
नगर आयुक्त का रुख: “बजट मिलते ही शुरू होगा काम”
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, जमीन का चिह्नीकरण पहले ही किया जा चुका है और अब केवल शासन से वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है। नगर आयुक्त ने बताया कि यह शेल्टर होम ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) नियमों के तहत संचालित किया जाएगा। इसके संचालन के लिए किसी अनुभवी एनजीओ (NGO) या विशेषज्ञ संस्था की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि कुत्तों की देखभाल में कोई कोताही न बरती जाए।
निष्कर्ष: हल्द्वानी बनेगा ‘स्मार्ट और सुरक्षित’
हल्द्वानी नगर निगम की यह ₹1 करोड़ की योजना शहर के बुनियादी ढांचे और जनसुरक्षा की दिशा में एक बड़ा निवेश है। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो हल्द्वानी उत्तराखंड का ऐसा पहला शहर बन सकता है जिसने आवारा कुत्तों की समस्या का एक स्थायी और मानवीय समाधान निकाला है। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे जल्द धरातल पर उतारने की मांग की है।





