हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में पुलिस ने एक बड़े जालसाजी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो एक जनसेवा केंद्र (CSC) की आड़ में फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने का काला कारोबार चला रहा था। यह गिरोह पिछले काफी समय से भोले-भाले लोगों और अवैध रूप से रह रहे संदिग्धों को जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज फर्जी तरीके से मुहैया करा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में नकली मोहरें, सरकारी लेटरहेड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
छापेमारी और गिरफ्तारी: गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई
हरिद्वार पुलिस की स्पेशल सेल और स्थानीय कोतवाली पुलिस को पिछले कुछ दिनों से इस अवैध धंधे की सूचना मिल रही थी:
- मुखबिर की सूचना: पुलिस को खबर मिली थी कि क्षेत्र का एक जनसेवा केंद्र संचालक निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक पैसे लेकर बिना किसी आधिकारिक सत्यापन के प्रमाण पत्र तैयार कर रहा है।
- घेराबंदी: पुलिस ने एक फर्जी ग्राहक बनकर केंद्र पर भेजा, जहाँ सौदा तय होते ही टीम ने छापेमारी कर दी। मौके से मुख्य संचालक और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे चलता था जालसाजी का खेल?
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह तकनीक का दुरुपयोग कर सरकारी सिस्टम में सेंध लगा रहा था:
- सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़: आरोपी असली वेबसाइट से मिलते-जुलते पोर्टल या एडिटिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर हूबहू सरकारी प्रमाण पत्र तैयार करते थे।
- नकली मोहरों का अंबार: पुलिस ने मौके से तहसीलदारों, पार्षदों और ग्राम प्रधानों के नाम की दर्जनों फर्जी मोहरें बरामद की हैं। इन मोहरों का इस्तेमाल दस्तावेजों को ‘असली’ दिखाने के लिए किया जाता था।
- संदिग्धों को फायदा: आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने कुछ ऐसे लोगों के भी पहचान पत्र बनाए हैं, जिनकी नागरिकता संदिग्ध है। पुलिस अब उन सभी लाभार्थियों की सूची खंगाल रही है जिन्होंने पिछले छह महीनों में यहाँ से दस्तावेज बनवाए हैं।
बरामदगी: कंप्यूटर से लेकर जाली दस्तावेज तक
पुलिस ने छापेमारी के दौरान निम्नलिखित सामान जब्त किया है:
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: दो हाई-टेक कंप्यूटर, तीन प्रिंटर और कई हार्ड ड्राइव्स जिनमें फर्जी दस्तावेजों के टेम्पलेट्स मिले हैं।
- खाली दस्तावेज: भारी संख्या में ऐसे फॉर्म और होलोग्राम बरामद हुए हैं जिनका उपयोग केवल सरकारी कार्यालयों में होता है।
- नकद राशि: आरोपियों के पास से हजारों रुपये की नकदी भी बरामद हुई है, जो उन्होंने ग्राहकों से वसूली थी।
प्रशासन सख्त: लाइसेंस रद्द करने की तैयारी
इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने भी कड़ा रुख अपनाया है:
- सत्यापन अभियान: जिलाधिकारी ने जिले के सभी जनसेवा केंद्रों के औचक निरीक्षण और दस्तावेजों के सत्यापन के आदेश दिए हैं।
- लाइसेंस निरस्तीकरण: पकड़े गए केंद्र का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया है और आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC 420) और जालसाजी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।





