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हरिद्वार के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का संकट: उधार के चावल से बुझ रही बच्चों की भूख, कई विद्यालयों में बंद हुआ भोजन

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के सरकारी स्कूलों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मध्याह्न भोजन योजना’ (मिड-डे मील) दम तोड़ती नजर आ रही है। जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चावल का स्टॉक पूरी तरह खत्म होने से गहरा संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी विकट है कि प्रधानाध्यापकों को स्थानीय राशन डीलरों से उधार पर चावल मांगकर बच्चों का पेट भरना पड़ रहा है, वहीं कई स्कूलों में संसाधन न होने के कारण मिड-डे मील पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

उधार के बोझ तले दबे प्रधानाध्यापक

जिले के कक्षा 1 से 8 तक के हजारों बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अब शिक्षकों के लिए सिरदर्द बन गई है। चावल की सरकारी आपूर्ति ठप होने के कारण स्कूलों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।

  • राशन डीलरों से उधारी: योजना को सुचारू रखने के लिए स्कूल प्रबंधन स्थानीय सरकारी राशन की दुकानों से उधार पर चावल उठा रहे हैं।
  • बढ़ता कर्ज: प्रधानाध्यापकों का कहना है कि उधारी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। समय पर भुगतान न होने और पिछला बकाया न मिलने के कारण अब राशन डीलर भी हाथ खड़े करने लगे हैं।
  • शिक्षकों की चिंता: कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि जल्द ही चावल की खेप नहीं पहुँची, तो जिले के अधिकांश स्कूलों में चूल्हे ठंडे पड़ जाएंगे।

कई स्कूलों में योजना ठप: भूखे रह रहे बच्चे

हरिद्वार जनपद के कुछ दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से ऐसी खबरें भी आ रही हैं जहाँ पिछले कुछ दिनों से मध्याह्न भोजन नहीं बन सका है।

  • भोजन बंद होने का कारण: जिन स्कूलों के पास उधार लेने की क्षमता खत्म हो गई है या जहाँ राशन डीलरों ने मना कर दिया है, वहां मिड-डे मील सेवा पूरी तरह रोक दी गई है।
  • छात्रों पर प्रभाव: सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, जिनके लिए यह भोजन पोषण का मुख्य स्रोत होता है। मिड-डे मील बंद होने से उनकी उपस्थिति और स्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर देरी और लापरवाही

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग और रसद विभाग (Supply Department) के बीच समन्वय की कमी और बजट आवंटन में देरी को इस संकट की मुख्य वजह माना जा रहा है।

“मध्याह्न भोजन योजना की व्यवस्था एक बार फिर पटरी से उतरती दिख रही है। कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए चावल का गंभीर संकट खड़ा होना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। अधिकारियों को इस ओर तुरंत ध्यान देकर आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।”

आगे की राह और मांग

अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द स्कूलों को चावल का कोटा आवंटित किया जाए। साथ ही, राशन डीलरों के पुराने बकाये का भुगतान करने की प्रक्रिया भी तेज की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

फिलहाल, हरिद्वार के कई स्कूलों में बच्चे दोपहर की घंटी बजने पर थाली लेकर बैठने के बजाय खाली पेट रहने को मजबूर हैं।

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