देहरादून (27 मार्च, 2026): उत्तराखंड राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) द्वारा प्रदेश में पहली बार स्कूल बस और वैन के लिए आधिकारिक किराया दरें (Rate List) निर्धारित कर दी गई हैं। सरकार के इस फैसले ने राज्य के लाखों अभिभावकों के बीच हलचल मचा दी है। जहाँ कुछ इसे पारदर्शिता की ओर एक कदम मान रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में अभिभावकों का आरोप है कि नई दरें वर्तमान किराए से काफी अधिक हैं, जिससे उनके मासिक बजट पर भारी असर पड़ेगा।
क्या है नया किराया ढांचा?
राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में ‘मेहरा कमेटी’ की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए दूरी के आधार पर मासिक किराया तय किया गया है:
- स्कूल बस हेतु मासिक दरें:
- 1 से 10 किलोमीटर: ₹2200
- 10 से 20 किलोमीटर: ₹2700
- 20 से 30 किलोमीटर: ₹3200
- 30 किलोमीटर से अधिक: ₹3700
- स्कूल वैन/मैक्सी वाहन हेतु दरें:
- 1 से 5 किलोमीटर: ₹2100
- 5 से 10 किलोमीटर: ₹2500
- 10 से 20 किलोमीटर: ₹3000
विशेष प्रावधान: पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन दरों में 10% तक की अतिरिक्त वृद्धि की अनुमति दी गई है। साथ ही, गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों के दौरान किराए में 25% की छूट अनिवार्य की गई है।
अभिभावकों की चिंता और मांग
अभिभावक संघों का कहना है कि कई क्षेत्रों में पहले से लिया जा रहा किराया इन सरकारी दरों से कम था। अब स्कूल संचालक सरकारी आदेश का हवाला देकर किराए में अचानक 30% से 50% तक की बढ़ोतरी कर रहे हैं।
- आर्थिक बोझ: मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि स्कूल फीस के साथ-साथ अब परिवहन शुल्क भी इतना अधिक होने से शिक्षा बच्चों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
- विरोध प्रदर्शन: देहरादून, हल्द्वानी और हरिद्वार जैसे शहरों में अभिभावकों ने इस निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है और सरकार से इन दरों पर पुनर्विचार करने या इन्हें वापस लेने की मांग की है।
सरकार का पक्ष
परिवहन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों, वाहन मेंटेनेंस, ड्राइवर-हेल्पर के वेतन और सुरक्षा मानकों (जैसे GPS, पैनिक बटन) को ध्यान में रखकर ये दरें वैज्ञानिक तरीके से तय की गई हैं। सरकार का दावा है कि इससे स्कूलों द्वारा की जाने वाली “अघोषित वसूली” पर रोक लगेगी और एक समान व्यवस्था लागू होगी।





