Tuesday, March 3, 2026

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सेना को मिलेगी स्वदेशी लेजर आधारित एंटी-ड्रोन प्रणाली

नई दिल्ली।
भारतीय सेना की मारक क्षमता और निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सेना को अब स्वदेशी तकनीक से विकसित लेजर आधारित एंटी-ड्रोन प्रणाली मिलने जा रही है। इस उन्नत प्रणाली के शामिल होने से सेना की आसमानी सुरक्षा कई गुना मजबूत होगी। खास बात यह है कि यह सिस्टम दो किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन ड्रोन को सटीक निशाने के साथ निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और देश की एक प्रमुख निजी रक्षा कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यह अत्याधुनिक प्रणाली आधुनिक युद्धक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। हाल के वर्षों में सीमाओं पर ड्रोन घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और निगरानी गतिविधियों में बढ़ोतरी को देखते हुए सेना को ऐसी तकनीक की आवश्यकता महसूस हो रही थी। इस नई प्रणाली से न केवल ड्रोन को मार गिराया जा सकेगा, बल्कि दुश्मन की निगरानी और जासूसी योजनाओं को भी समय रहते विफल किया जा सकेगा।

सूत्रों के अनुसार, एंटी-ड्रोन सिस्टम में हाई-एनर्जी लेजर बीम, ट्रैकिंग रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और कमांड कंट्रोल यूनिट जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं। लेजर बीम की मदद से यह प्रणाली उड़ते हुए ड्रोन की पहचान कर उन्हें कुछ सेकंड में ही नष्ट कर सकती है। इस तकनीक का परीक्षण कई चरणों में किया गया, जिसमें यह सिस्टम दिन और रात दोनों समय समान प्रभावशीलता के साथ सफल रहा।

सेना के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन एक प्रमुख हथियार के रूप में उभर रहे हैं, ऐसे में एंटी-ड्रोन सिस्टम किसी भी सेना के लिए अनिवार्य हो गया है। स्वदेशी तकनीक से तैयार यह प्रणाली न केवल लागत में कम है, बल्कि इसे देश की भू-सीमाओं और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस प्रणाली के पहले बैच को सेना को सौंपेगा। आने वाले महीनों में इसे विभिन्न फॉरवर्ड लोकेशनों और संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर तैनात किया जाएगा। इस नई तकनीक के शामिल होने से भारतीय सेना को दुश्मन की किसी भी हवाई चुनौती का तुरंत और सटीक जवाब देने में बड़ी मदद मिलेगी।

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