नई दिल्ली। राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के नाम पर हुआ बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ 97 लाख रुपये की हेराफेरी का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि इस राशि से जीवन रक्षक मशीनों की खरीद दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया। मामला सीधे तौर पर कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू) से जुड़ा है, जहां उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई।
सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के इस अधिकारी ने कागजों में महंगी मशीनें खरीदी हुई दिखाईं, लेकिन हकीकत में या तो उपकरण खरीदे ही नहीं गए या फिर घटिया गुणवत्ता वाले संसाधन इस्तेमाल किए गए। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि 97 लाख रुपये का भारी-भरकम घोटाला जीवन रक्षक मशीनों के नाम पर अंजाम दिया गया।
सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की गहन छानबीन की। दस्तावेजों की जांच और गवाहों के बयान के आधार पर यह साफ हुआ कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस घोटाले के सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिन उपकरणों के भरोसे मरीजों की जान बचाई जानी थी, वही मशीनें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। मरीजों और उनके परिजनों में इस खुलासे के बाद गहरा आक्रोश है।
सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और बहुत जल्द इसमें शामिल अन्य लोगों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।





