तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। ईरान ने अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के प्रस्ताव को ठुकराते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के इस कड़े रुख के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरे के बादल और गहरे हो गए हैं।
अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव ठुकराया: तेहरान का रुख
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि उनका देश किसी भी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा जो स्थायी न हो।
- वाशिंगटन पर अविश्वास: ईरानी अधिकारी के मुताबिक, तेहरान का मानना है कि वाशिंगटन (अमेरिका) एक स्थायी संघर्ष-विराम के लिए वास्तव में तैयार नहीं है। ईरान का तर्क है कि अमेरिका केवल समय हासिल करने के लिए अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव दे रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में वह तनाव कम करने का इच्छुक नहीं है।
- होर्मुज पर नियंत्रण: ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होतीं और एक ठोस स्थायी समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल नहीं की जाएगी।
होर्मुज जलमार्ग: वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है।
“होर्मुज को बंद रखने के ईरान के फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहा, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिससे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर सबसे बुरा असर पड़ेगा।”
पाकिस्तान की रहस्यमयी चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान का रुख काफी चौंकाने वाला रहा है। इस गंभीर संकट पर पाकिस्तान ने अभी तक पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।
- कूटनीतिक दबाव: विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक तरफ ईरान के साथ अपने संबंधों को बचाना चाहता है, तो दूसरी तरफ वह अमेरिका और खाड़ी देशों को नाराज करने की स्थिति में नहीं है। यही कारण है कि इस्लामाबाद इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी आधिकारिक बयान देने से बच रहा है।
आगे क्या? तनाव बढ़ने के आसार
ईरान के इस इनकार के बाद अब गेंद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पाले में है। यदि कूटनीतिक रास्ते बंद होते हैं, तो अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई या और कड़े प्रतिबंधों की संभावना बढ़ जाएगी।
- वैश्विक चिंता: संयुक्त राष्ट्र और ओमान जैसे मध्यस्थ देश अभी भी पर्दे के पीछे से बातचीत को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान के अड़ियल रुख ने इन कोशिशों को मुश्किल बना दिया है।
क्षेत्रीय तनाव के इस दौर में अब सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए क्या नया रास्ता निकालते हैं।





