Sunday, February 8, 2026

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सांस्कृतिक विरासत की घर वापसी: अमेरिका से भारत लाई जाएंगी भगवान शिव नटराज समेत तीन ऐतिहासिक मूर्तियां; चोल और विजयनगर काल से है गहरा नाता

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को वापस लाने के प्रयासों में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। दशकों पहले भारत के मंदिरों से चोरी कर विदेश तस्करी की गई भगवान शिव नटराज की प्रतिमा समेत तीन दुर्लभ कांस्य मूर्तियों को जल्द ही अमेरिका से वापस भारत लाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय जांच और कूटनीतिक सहयोग के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने इन मूर्तियों को भारत को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये मूर्तियां चोल और विजयनगर राजवंशों के काल की हैं, जो भारतीय शिल्प कला के स्वर्ण युग का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इन तीन मूर्तियों की होगी वापसी

वापस लाई जा रही मूर्तियों में प्रत्येक का अपना ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है:

  1. भगवान शिव नटराज (कांस्य): यह मूर्ति चोल काल (9वीं-13वीं शताब्दी) की है। नटराज रूप में शिव का यह ‘आनंद तांडव’ शिल्प कला का बेजोड़ नमूना माना जाता है।
  2. देवी पार्वती की प्रतिमा: विजयनगर साम्राज्य के काल की यह प्रतिमा अपनी सूक्ष्म नक्काशी और शास्त्रीय सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
  3. एक अन्य प्राचीन कांस्य मूर्ति: यह मूर्ति भी दक्षिण भारत के एक प्राचीन मंदिर से जुड़ी बताई जा रही है, जिसकी पहचान की पुष्टि पुरातत्व विभाग (ASI) ने की है।

कैसे पकड़ी गई तस्करी?

इन मूर्तियों की वापसी ‘ऑपरेशन हिडन आइडल’ और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन (HSI) की लंबी जांच का परिणाम है।

  • तस्करों का जाल: जांच में पाया गया कि इन मूर्तियों को तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों से चुराया गया था और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय कला बाजारों में बेचा गया था।
  • मैनहट्टन जिला अटॉर्नी का सहयोग: न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने इन कलाकृतियों को जब्त करने और इनके मूल स्रोत (भारत) की पहचान करने में भारतीय दूतावास की मदद की।

चोल और विजयनगर काल का गौरव

  • चोल राजवंश: चोल काल को ‘कांस्य मूर्तियों का स्वर्ण काल’ कहा जाता है। इस दौरान बनी मूर्तियां अपनी ‘लॉस्ट वैक्स’ तकनीक और जीवंतता के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं।
  • विजयनगर साम्राज्य: इस काल की मूर्तियों में राजसी भव्यता और भक्ति भाव का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो अब वापस अपने मूल स्थान पर लौटेंगी।

सरकार का ‘विरासत भी, विकास भी’ संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में विदेशों से पुरावशेषों को वापस लाने के अभियान में तेजी आई है।

  1. रिकॉर्ड वापसी: 2014 के बाद से अब तक 250 से अधिक चोरी की गई प्राचीन कलाकृतियां भारत वापस लाई जा चुकी हैं।
  2. ASI की भूमिका: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इन मूर्तियों के वापस आने के बाद इनकी वैज्ञानिक जांच करेगा और फिर इन्हें इनके मूल राज्य या राष्ट्रीय संग्रहालय में स्थापित किया जाएगा।

संस्कृति मंत्रालय की प्रतिक्रिया

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह न केवल कानूनी जीत है, बल्कि हमारी सभ्यतागत पहचान की बहाली भी है।

“हमारी चुराई गई विरासत का एक-एक अंश वापस लाना हमारी प्रतिबद्धता है। भगवान नटराज और अन्य मूर्तियों की वापसी भारत-अमेरिका के मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों और कानून प्रवर्तन सहयोग का प्रतीक है।” — प्रवक्ता, संस्कृति मंत्रालय

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