नई दिल्ली/देहरादून: सरकारी स्कूलों में लगातार कम हो रही बच्चों की संख्या और निजी स्कूलों की ओर बढ़ते रुझान को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक और शैक्षिक बदलाव किया है। अब प्रदेश के सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों (प्राइमरी स्कूलों) के परिसर के भीतर ही नए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही सरकारी स्कूल के वातावरण से जोड़ना है, ताकि प्री-प्राइमरी शिक्षा पूरी करने के बाद वे सीधे उसी स्कूल की पहली कक्षा में दाखिला लें। शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के इस संयुक्त प्रयास को ‘स्कूल रेडिनेस’ कार्यक्रम के तहत एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत? पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई थी कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में भारी गिरावट आई है। इसके पीछे मुख्य कारण थे:
- निजी स्कूलों का आकर्षण: अभिभावक छोटे बच्चों को प्ले-ग्रुप या नर्सरी के लिए निजी स्कूलों में भेजते थे, जिसके बाद बच्चा वहीं प्राथमिक शिक्षा भी पूरी करता था।
- दूरी की समस्या: आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राइमरी स्कूलों के अलग-अलग स्थानों पर होने से तालमेल की कमी रहती थी।
- प्रारंभिक आधार की कमी: सरकारी स्कूलों में नर्सरी या केजी (KG) जैसी कक्षाओं का अभाव होने के कारण बच्चे सीधे पहली कक्षा में आते थे, जिससे उनका शैक्षिक आधार निजी स्कूल के बच्चों के मुकाबले कमजोर रहता था।
योजना के प्रमुख लाभ: एक ही छत के नीचे होगी पढ़ाई और पोषण इस एकीकरण से शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों मोर्चों पर सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है:
- सीधा नामांकन (Direct Enrollment): आंगनबाड़ी में खेल-खेल में सीखने वाले बच्चे सहज रूप से स्कूल के शिक्षकों और वातावरण से परिचित हो जाएंगे। इससे पहली कक्षा में ड्रॉपआउट दर (Drop-out rate) शून्य हो जाएगी।
- संसाधनों का साझा उपयोग: स्कूल के खेल के मैदान, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं का लाभ आंगनबाड़ी के बच्चों को भी मिल सकेगा।
- बेहतर निगरानी: स्कूल के प्रधानाध्यापक आंगनबाड़ी की गतिविधियों और वहां मिलने वाले पोषाहार की बेहतर निगरानी कर सकेंगे।
- अभिभावकों का भरोसा: स्कूल परिसर में सुरक्षा और शैक्षिक माहौल को देखकर अभिभावकों का विश्वास सरकारी तंत्र पर बढ़ेगा।
शिक्षकों और कार्यकर्ताओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण इस योजना को सफल बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्राथमिक शिक्षकों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। ‘नई शिक्षा नीति-2020’ (NEP 2020) के अनुरूप, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन’ (ECCE) के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे बच्चों को आधुनिक खेल पद्धतियों से पढ़ा सकें।
प्रशासनिक आदेश और कार्यान्वयन शिक्षा सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जिन स्कूलों में अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर आंगनबाड़ी शिफ्ट की जाए। जहां जगह की कमी है, वहां नए कमरों के निर्माण के लिए बजट आवंटित किया जा रहा है।
“यह निर्णय सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद मजबूत करने वाला है। जब बच्चा आंगनबाड़ी से ही स्कूल परिसर में रहना शुरू करेगा, तो वह मानसिक रूप से स्कूल से जुड़ जाएगा। इससे न केवल छात्र संख्या बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।” — महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा





