नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में आज उस समय एक नया मोड़ आ गया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव खुलकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के समर्थन में खड़े हो गए। पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब के अंशों को लेकर जब सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के भाषण में बाधा डाली, तो अखिलेश यादव ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए ‘विपक्ष के नेता’ (LoP) को अपनी बात पूरी करने और तथ्यों को सदन के सामने रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। इस दौरान अखिलेश ने प्रखर समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया का जिक्र करते हुए सरकार को संसदीय मर्यादाओं की याद दिलाई।
“लोहिया जी कहते थे— जब सड़कें खामोश हो जाएं, तो संसद आवारा हो जाती है”
अखिलेश यादव ने सदन में अपने संबोधन के दौरान डॉ. लोहिया के प्रसिद्ध विचारों को उद्धृत करते हुए सत्ता पक्ष पर निशाना साधा:
- संसदीय परंपरा: अखिलेश ने कहा कि यदि सदन में विपक्ष की आवाज को दबाया जाएगा, तो यह लोकतंत्र की मूल आत्मा पर प्रहार होगा। उन्होंने लोहिया का जिक्र करते हुए कहा कि जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं, और संसद को हर गंभीर मुद्दे पर चर्चा का केंद्र होना चाहिए।
- पढ़ने की आजादी: उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई सांसद किसी पूर्व सैन्य प्रमुख की किताब के अंश पढ़ रहा है, तो सरकार को इससे डर क्यों लग रहा है? उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी को उन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
अग्निपथ योजना पर सपा का कड़ा रुख
राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए अखिलेश यादव ने भी ‘अग्निपथ योजना’ पर सरकार को घेरा:
- आधी-अधूरी तैयारी: अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी शुरू से ही इस योजना का विरोध करती आई है क्योंकि यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
- सेना का मनोबल: उन्होंने तर्क दिया कि जब पूर्व सेना प्रमुख की किताब में ही योजना के प्रारूप पर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को हठधर्मिता छोड़कर इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक
अखिलेश यादव के इस हस्तक्षेप के बाद सदन में बहस और तेज हो गई:
- बीजेपी का जवाब: संसदीय कार्य मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को बोलने की पूरी आजादी है, लेकिन वे सदन का उपयोग ‘भ्रम’ फैलाने और किसी की अप्रकाशित किताब का प्रचार करने के लिए नहीं कर सकते।
- इंडिया (INDIA) गठबंधन की एकजुटता: अखिलेश के भाषण के दौरान कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके के सांसदों ने मेजें थपथपाकर उनका समर्थन किया, जिससे सदन में विपक्षी एकजुटता का कड़ा संदेश गया।
लोहिया के आदर्शों पर बहस
अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि डॉ. लोहिया हमेशा संसद को जनता की आवाज का प्रतिबिंब मानते थे। उन्होंने कहा कि आज जब किसान और युवा परेशान हैं, तो सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब आंकड़ों के बजाय संवेदनशीलता से देना चाहिए।
“लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सरकार की। अगर विपक्ष के नेता को सदन में पढ़ने और बोलने से रोका जाएगा, तो यह तानाशाही की शुरुआत होगी। लोहिया जी ने हमें अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया है और हम पीछे नहीं हटेंगे।” — अखिलेश यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी





