इस्लामाबाद।
सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा सहयोग समझौते के बाद पाकिस्तान के नेताओं के बयानों में अचानक आक्रामकता झलकने लगी है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया है कि यह समझौता भविष्य में नाटो जैसी बहुपक्षीय डील का रास्ता खोल सकता है।
“क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर”
मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब के साथ किया गया रक्षा समझौता केवल द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए क्षेत्रीय स्तर पर सैन्य सहयोग की नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर हालात अनुकूल रहे तो पाकिस्तान अन्य इस्लामी देशों के साथ भी नाटो शैली की सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में बढ़ सकता है।
सऊदी-पाकिस्तान समझौते की अहमियत
पिछले सप्ताह रियाद और इस्लामाबाद के बीच हुए इस समझौते में संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया सहयोग और रक्षा तकनीक साझा करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाने का अवसर देगा।
पाकिस्तान का ‘बड़बोलापन’
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह बयान वास्तविकता से कहीं दूर है। नाटो जैसे किसी भी बहुपक्षीय सैन्य संगठन के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति, आर्थिक स्थिरता और भरोसेमंद रक्षा ढांचा आवश्यक होता है। पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति और आंतरिक चुनौतियां इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही हैं।
भारत पर निगाहें
सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह बयान भारत के प्रति मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब की साझेदारी को भारत के खिलाफ रणनीतिक बढ़त के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है।
क्षेत्रीय राजनीति में नया समीकरण?
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया दोनों ही भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं। ईरान, अफगानिस्तान और खाड़ी देशों की बदलती भूमिका के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब का यह नजदीकी आना भविष्य में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर डाल सकता है।





