नई दिल्ली: संसद के आगामी सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट एक नए शिखर पर पहुंचने वाली है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने की पूरी तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दल 9 मार्च को सदन में आधिकारिक तौर पर यह प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। यदि यह प्रस्ताव पटल पर आता है, तो भारतीय संसदीय इतिहास में यह एक अत्यंत दुर्लभ और गंभीर घटना होगी, जो विधायी कार्यप्रणाली और विपक्ष की आवाज के बीच बढ़ती खाई को दर्शाती है।
प्रस्ताव के पीछे का मुख्य कारण: विपक्ष के गंभीर आरोप विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष पर ‘पक्षपाती’ होने के कई आरोप लगाए हैं:
- आवाज दबाने का आरोप: विपक्ष का दावा है कि महत्वपूर्ण मुद्दों, जैसे महंगाई और बेरोजगारी पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों के माइक बार-बार बंद कर दिए जाते हैं।
- सांसदों का निलंबन: हाल के सत्रों में रिकॉर्ड संख्या में विपक्षी सांसदों के निलंबन को विपक्ष ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।
- विधेयकों का पारित होना: आरोप लगाया गया है कि बिना पर्याप्त बहस और विपक्ष की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराया जा रहा है।
क्या है संवैधानिक प्रक्रिया? कैसे हटाया जाता है स्पीकर? लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और सदन के नियमों के तहत निर्धारित है:
- 14 दिनों का नोटिस: प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले अध्यक्ष को लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
- 50 सांसदों का समर्थन: सदन में इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है।
- प्रभावी बहुमत: स्पीकर को उनके पद से हटाने के लिए सदन के तत्कालीन सदस्यों के ‘प्रभावी बहुमत’ (Effective Majority) द्वारा पारित संकल्प की आवश्यकता होती है।
सत्ता पक्ष का रुख: “यह केवल दबाव बनाने की राजनीति” भाजपा और सहयोगी दलों ने विपक्ष के इस संभावित कदम को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है। सरकार के मंत्रियों का तर्क है कि ओम बिरला ने हमेशा नियमों के तहत सदन का संचालन किया है और विपक्ष हार की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। भाजपा का मानना है कि विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसलिए यह प्रस्ताव केवल सुर्खियां बटोरने और संसदीय कार्यवाही में बाधा डालने का एक जरिया है।
9 मार्च की तारीख क्यों है अहम? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 9 मार्च को बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान विपक्ष अपनी पूरी ताकत झोंकने की योजना बना रहा है। इस दिन सदन में भारी हंगामे के आसार हैं, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ‘लोकतंत्र बचाने की लड़ाई’ के रूप में पेश करना चाहता है।





