नई दिल्ली: संसद के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रहा गतिरोध अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक सनसनीखेज वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस सांसदों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। रिजिजू का दावा है कि विपक्षी सांसदों ने न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाई, बल्कि वे जबरन लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के चैंबर में घुस गए और वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और संसद की सुरक्षा व मर्यादा को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
वीडियो का सच: रिजिजू ने लगाए ‘अलोकतांत्रिक’ व्यवहार के आरोप
केंद्रीय मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और उनके बयानों के अनुसार, घटना उस समय की है जब सदन की कार्यवाही स्थगित थी:
- चैंबर में प्रवेश: वीडियो में कथित तौर पर कुछ कांग्रेस सांसदों को स्पीकर के कार्यालय (चैंबर) की ओर बढ़ते और सुरक्षाकर्मियों से उलझते देखा जा सकता है।
- विवादित नारेबाजी: रिजिजू ने आरोप लगाया कि सांसदों ने वहां ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जो न केवल असंसदीय है, बल्कि सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री को धमकी देने जैसी है।
- मर्यादा का उल्लंघन: सरकार का तर्क है कि स्पीकर का चैंबर एक पवित्र स्थान है जहाँ बिना अनुमति प्रवेश वर्जित है, और इस तरह का कृत्य लोकतंत्र के ‘मंदिर’ का अपमान है।
सरकार का हमला: ‘यह विपक्ष की हताशा का प्रतीक’
किरेन रिजिजू ने इस घटना को कांग्रेस की ‘पुरानी संस्कृति’ से जोड़ते हुए तीखा हमला बोला है:
- अराजकता का आरोप: मंत्री ने कहा कि हार की हताशा में कांग्रेस सांसद अब अराजकता पर उतारू हो गए हैं और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को डराने का प्रयास कर रहे हैं।
- सदन चलाने में बाधा: सरकार का कहना है कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है और केवल शोर-शराबा कर जनता के पैसे और समय की बर्बादी कर रहा है।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत: सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मामले को ‘विशेषाधिकार समिति’ (Privilege Committee) के पास भेजने पर विचार कर रही है ताकि दोषी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।
विपक्ष की सफाई: ‘सच्चाई को दबाने की कोशिश’
दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी खेमे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार पर पलटवार किया है:
- जनता का ध्यान भटकाना: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बुनियादी मुद्दों (जैसे बेरोजगारी और महंगाई) से ध्यान भटकाने के लिए पुराने या एडिट किए गए वीडियो का सहारा ले रही है।
- विरोध का अधिकार: विपक्ष का तर्क है कि वे केवल अपनी बात रखने और जनता की आवाज उठाने के लिए स्पीकर से मिलने गए थे, जिसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।





