नई दिल्ली।
भारत जल्द ही संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों (UN Peacekeeping Operations) को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक में दुनिया के 30 देशों के शीर्ष सैन्य नेतृत्व और रक्षा विशेषज्ञ शामिल होंगे। आयोजन का उद्देश्य शांति अभियानों की रणनीति, सहयोग और भविष्य की चुनौतियों पर गहन विमर्श करना है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस उच्च-स्तरीय बैठक के लिए पाकिस्तान और चीन को आमंत्रण नहीं भेजा है। माना जा रहा है कि यह फैसला भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पाकिस्तान और चीन दोनों ही संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में शामिल रहे हैं, लेकिन भारत ने इस बार उन्हें सूची से बाहर रखकर साफ संकेत दिया है।
भारत की ओर से कहा गया है कि शांति अभियानों की सफलता के लिए केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण, बेहतर तालमेल और स्थानीय परिस्थितियों की समझ भी आवश्यक है। बैठक में इसी विषय पर विभिन्न देशों के अनुभव और सुझाव साझा किए जाएंगे।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत का योगदान ऐतिहासिक और उल्लेखनीय रहा है। भारत ने दशकों से अफ्रीका, एशिया और अन्य क्षेत्रों में हजारों सैनिक और पुलिस बल भेजकर शांति स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई है। कई बार भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अपनी जान की बाजी लगाकर स्थानीय आबादी की रक्षा की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी रेखांकित करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के पक्ष में आवाज उठा रहा है। आयोजन के दौरान भारत यह संदेश भी देना चाहेगा कि वह न केवल शांति अभियानों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता देश है, बल्कि उनकी रणनीतिक दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
बैठक का एजेंडा अंतिम रूप में अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसमें शांति अभियानों में नई तकनीक का इस्तेमाल, आतंकवाद से निपटने की चुनौतियां, महिला सैनिकों की बढ़ती भागीदारी और मानवाधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।





