भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। हिंदी में एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई शुरू करने के बाद, अब मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है जहां यूनानी चिकित्सा (BUMS) की पढ़ाई भी हिंदी भाषा में कराई जाएगी। राज्य के आयुष विभाग ने इसके लिए विस्तृत पाठ्यक्रम (Curriculum) तैयार कर लिया है और किताबों के अनुवाद का कार्य भी अंतिम चरण में है। इस पहल का उद्देश्य भाषाई बाधाओं को दूर कर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए यूनानी चिकित्सा पद्धति को और अधिक सुलभ बनाना है।
पाठ्यक्रम तैयार: विशेषज्ञों की टीम ने किया अनुवाद
यूनानी चिकित्सा के पाठ्यक्रमों को हिंदी में तैयार करने के लिए प्रदेश के वरिष्ठ विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी:
- शब्दावली का संरक्षण: पाठ्यक्रम को हिंदी में अनुवादित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि यूनानी चिकित्सा के मूल शब्दों और तकनीकी शब्दावली (Terminology) का अर्थ न बदले।
- किताबों की उपलब्धता: प्रथम वर्ष के लिए आवश्यक सभी विषयों की किताबों का हिंदी रूपांतरण पूरा हो चुका है। इन्हें जल्द ही आयुष कॉलेजों में उपलब्ध कराया जाएगा।
- वैकल्पिक व्यवस्था: छात्रों के पास यह विकल्प होगा कि वे अपनी परीक्षा हिंदी या अंग्रेजी, किसी भी भाषा में दे सकेंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?
आयुष राज्य मंत्री ने इस निर्णय को ‘भाषा के सशक्तिकरण’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है:
- छात्रों की सुगमता: प्रदेश के सरकारी स्कूलों और हिंदी माध्यम से पढ़कर आने वाले छात्रों को अक्सर अंग्रेजी और उर्दू/अरबी प्रधान शब्दावली के कारण यूनानी चिकित्सा समझने में कठिनाई होती थी। हिंदी में पढ़ाई होने से वे विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
- आयुष को बढ़ावा: यूनानी चिकित्सा भारत की प्राचीन और लोकप्रिय चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। स्थानीय भाषा में पढ़ाई होने से इस क्षेत्र में शोध (Research) और अभ्यास करने वाले युवाओं की संख्या बढ़ेगी।
- रोजगार के अवसर: हिंदी में शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉक्टर स्थानीय मरीजों के साथ बेहतर संवाद कर सकेंगे, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उनकी प्रभावशीलता बढ़ेगी।
एमबीबीएस के बाद अब आयुष की बारी
मध्य प्रदेश सरकार पहले ही देश में सबसे पहले हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू कर चुकी है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार, राज्य सरकार धीरे-धीरे आयुष की अन्य पद्धतियों जैसे आयुर्वेद और होम्योपैथी के पाठ्यक्रमों को भी हिंदी में पूरी तरह लागू करने की योजना बना रही है।
अगले सत्र से शुरू होगी व्यवस्था
भोपाल के हकीम सैयद जियाउल हसन सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के अन्य निजी यूनानी कॉलेजों में नए सत्र से छात्र हिंदी में अपनी पढ़ाई शुरू कर सकेंगे। इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
“भाषा ज्ञान के मार्ग में बाधा नहीं होनी चाहिए। एमबीबीएस की सफलता के बाद यूनानी चिकित्सा को हिंदी में लाना हमारे लिए गर्व की बात है। इससे न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का भी विस्तार होगा।” — आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी





